उत्तराखंड से कुसुम भट्ट-
टिहरी राजघराने का ग्वालियर, उदयपुर लबोह और झालावाड़ के साथ ही जयपुर राजघराने से भी पुराना रिश्ता रहा है। इसलिए आज भी टिहरी और उत्तरकाशी में जहां-तहां राजस्थानी कला संस्कृति की झलक मिलती है। अब ऐसी ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खोती जा रही है।
इतिहास बताता है कि तत्कालीन गढ़वाल रियासत में पाल वंश के अंतिम दौर में राजस्थान के पंवार वंश से रिश्ता जुड़ गया था। इसलिए राजस्थान के राजा महाराजाओं का गढ़वाल का आना-जाना लगातार बना रहता था। चूंकि उस दौरान संपूर्ण गढ़वाल के साथ उत्तरकाशी भी टिहरी रियासत का ही अंग था और गंगोत्री यात्रा का भी यह मुख्य पड़ाव था। इसलिए उस समय जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह ने उत्तरकाशी में काशीविश्वनाथ के साथ एकादश रुद्र मंदिर की स्थापना कर उत्तरकाशी को पूर्ण काशी का रूप देने वाला जयपुर मंदिर व धर्मशालाएं बनवाई। इनमें आज भी राजस्थानी कला की झलक साफ दिखाई देती है। विडंबना यह है कि इन ऐतिहासिक मंदिरों व धर्मशालाओं की ओर ना तो पर्यटन विभाग और ना ही स्थानीय प्रशासन का ध्यान जा रहा है। इसके चलते उत्तरकाशी पहुंचने वाले अधिकांश तीर्थयात्री व पर्यटक इनसे रूबरू नहीं हो पाते। स्थानीय विद्वतजनों ने 19 वीं सदी के अंत में तत्कालीन माहराजा नरेंद्रशाह के कार्यकाल में जयपुर के माहराजा सवाई माधो सिंह से मदद का अनुरोध किया। इस पर उन्होंने अपनी महारानी बारवा राठौर के नाम पर नागर शैली के मंदिर व धर्मशाला का निर्माण करवाया। वर्ष 1901 में हुआ यह निर्माण काफी भव्य था। इस दौरान गंगोत्री धाम सहित धराली में भी जयपुर धर्मशालाएं स्थापित की गई। किंतु बिना देखरेख के दोनों का ही अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग से संचालित एकादश रुद्र मंदिर भी उपेक्षा का शिकार होकर अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। प्रदेश सरकार की उपेक्षा के चलते लंबे समय से मंदिर का सौंदर्यीकरण तक नहीं हो पाया है। हालांकि हाल ही में राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग की ओर से मंदिर परिसर में सत्संग हाल का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे इसके जीर्णोद्धार की कुछ उम्मीदें बंधी हैं। ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का होने के बावजूद पर्यटन विभाग या नगर पालिका के बोर्डो में इसे जगह नहीं दी जाती। वहीं अंधाधुंध अतिक्रमण भी प्रशासन की नजर में नहीं आ रहा है। इन्हीं कारणों के चलते इस मंदिर तक तीर्थयात्री व पर्यटक नहीं पहुंच पाते। इस संबंध में एसडीएम एसएल सेमवाल ने बताया कि कुछ दिन पहले राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग के प्रतिनिधि उत्तरकाशी पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण व विस्तारकरण की योजना बनाई है। अगले पर्यटक सीजन तक मंदिर का भव्य रूप सामने आने की उम्मीद है।
कुसुम भट्ट














