देहरादून - डीएम ने जिले के सभी SDM बदले , Jharna Kamthan होंगी City Megistrate. Manoj Kumar होंगे SDM Mussoorie. Vinod Giri होंगे SDM Sadar, खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "uttarakhandlive.in" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@uttarakhandlive.in पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms

Archive | पौड़ी गढ़वाल

बद्रीनाथ के कपाट 19 मई को खुलगें

Posted on 13 May 2010 by admin

देहरादून - 3,300 मीटर ऊंचाई पर स्थित भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम  के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए आगामी 19 मई को खुल रहे हैं, वैसे तो केदारनाथ धाम के कपाट 18 मई से खुल रहे हैं , चार धाम तीर्थयात्रा के दौरान इस बार तीर्थ यात्रियों को बद्रीनाथ में मुफ्त भोजन और प्रसाद देने की व्यवस्था की गई है।

बद्रीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने बताया कि  बद्रीनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए आगामी 19 मई को खुल रहे हैं। इस अवसर पर भीड़ को देखते हुए यात्रा मार्ग पर बिजली, पानी, आवास, यातायात, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था की स्थिति को दुरुस्त रखने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक सुके साथ निर्देश भी जारी किये गये हैं।

भट्ट ने बताया कि इस बार दर्शन के बाद प्रत्येक तीर्थ यात्री को मंदिर समिति की ओर से प्रसाद दिया जायेगा और चंदन का टीका भी लगाया जायेगा और मुफ्त में भोजन देने की व्यवस्था केदारनाथ और बद्रीनाथ में की जायेगी। इसके लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भट्ट ने बताया कि जो यात्री गर्भगृह के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे होंगे उन्हें ठंड से बचने के लिए मुफ्त में चाय पिलाने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि इस बार बद्रीनाथ में अलकनन्दा पर एक नया पुल बन जाने से यात्रियों को आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग की सुविधा दी जायेगी। लोग एक पुल से आयेंगे तथा दर्शन करने के बाद दूसरे पुल से वापस चले जायेंगे।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ में वीआईपी व्यक्तियों के आने से आम तीर्थयात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए गर्भगृह में प्रवेश के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 30 आम तीर्थयात्रियों के साथ एक वीआईपी को प्रवेश दिया जायेगा।

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वनों के विकास के लिए 201 करोड़ की स्वीकृति

Posted on 14 March 2010 by admin

उत्तराखण्ड के वनों के विकास को 13वें वित्त आयोग ने गम्भीरता से लिया है। इसमें प्रदेश के वनों के लिए 201 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। जो 12वें वित्त आयोग की अपेक्षा 166 करोड़ अधिक है। केन्द्र की इस पहल से प्रदेश में जंगलों के विकास और सुरक्षा के लिए वन महकमे को बजट के अभाव की समस्या से कम जूझना पड़ेगा।

देश में पर्यावरण को स्वच्छ रखने में उत्तराखण्ड के जंगल अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। वन संपदा के मामले सबसे धनी समझे जाने वाले उत्तराखण्ड में 53483 वर्ग किमी के कुल क्षेत्रफल में से 35651 वर्ग किमी क्षेत्रफल वन क्षेत्र है। जो पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना अहम योगदान दे रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 12वें वित्त आयोग में पहली बार प्रदेश के वनों के विकास के लिए 35 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया। जिससे महकमे को अपनी दस साल की कार्ययोजना में शामिल किए गए  कार्यो को पूरा करने में काफी मदद मिली।इस बार 13वें वित्त आयोग ने उत्तराखण्ड के वनों के विकास के प्रति और गम्भीरता दिखाई है।

गढ़वाल मण्डल के मुख्य वन संरक्षक डा.डी.बी.एस. खाती के अनुसार 13वें वित्त में वनों के लिए 201 करोड़ के बजट की स्वीकृति दी है। खाती  ने बताया कि इससे वन विभाग को जंगलों के विस्तार हेतु वनीकरण करने, वन्य प्राणियों के वास स्थलों के विकास में काफी मदद मिलेगी।

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राज्य एफिलिएटिंग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन

Posted on 17 February 2010 by admin

गढ़वाल के 52 गढ़ों में से एक रानीगढ़ के गौचर में स्थानीय जनता अपने अधिकारों और स्थानीय समस्याओं को लेकर लामबंद हो गई है। राज्य एफिलिएटिंग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर गौचर तथा आसपास के सैकड़ों गांवों की जनता 40 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही है। इस आंदोलन में युवा से लेकर उम्रदराज तक पुरुष और महिलायें शामिल हैं।

ये लोग गौचर के विकास और यहां की मूलभूत समस्याओं का मुद्दा भी उठाते हैं। उल्लेखनीय है कि गौचर का विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र और यहां की जमीन की उर्वरता हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रही है। गौचर की विशालता के अनुपात में यहां विकास नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गौचर को एजुकेशनल हब के रूप में खड़ा किया जा सकता था। लेकिन लोगों में एकजुटता के अभाव में गौचर को कुछ विशेष नहीं मिल सका, लेकिन इस बार राज्य एफिलिएटिंग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर लोग जिस तरह एकजुट हुए हैं, वह देखते ही बन रहा है।

संघर्ष समिति में सभी राजनीतिक दलों की सहभागिता है और सभी जन प्रतिनिधि चाहते हैं कि गौचर की समस्याओं के समाधान के लिए राजनैतिक विचारधाराओं को परे रखकर एकजुटता अवश्य दिखाई जानी चाहिए।

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प्रकृति की सुरम्य गोद मे बसा पौडी गढ़वाल

Posted on 21 January 2010 by admin

(कुसुम भट्ट )
pauti1पौडी गढ़वाल उत्तराखंड का एक जिल्ला, जिसका मुख्यालय, पौडी मे है। अल्मोड़ा, हरिद्वार, टेहरी, नैनी तल, चमोली, रुद्र पर्याग, हरिद्वार, देहरादून जिल्लों से घिरा यह जिला  उत्तर प्रदेश  के बिज्नोर से भी इस जिल्ले की सीमायें जुड़ी हुई हैं।
पौडी गढ़वाल, गढ़वाल राज्य का एक अंश था जब श्रीनगर राज्य की राजधानी थी, परन्तु बाद मे पुरा गढ़वाल ब्रिटिश गढ़वाल के नाम से जाना जाने लगा। देश के स्वतंत्र होने के बाद पौडी गढ़वाल के दो भाग किए गए एक हिस्सा चमोली गढ़वाल बना, और उत्तराखंड बन ने के बाद रुद्र पर्याग भी एक और भाग अलग जिल्ला बनाया गया।

प्रकृति की सुरम्य गोद मे बसा यह जिल्ला पर्यटन स्थलों से भरपूर है, पौडी जिल्ले के रोम-रोम मे बसी है प्रकृति की सुन्दरता, पौडी नगर से भी हिमालय का नज़ारा देखा जा सकता है, यहाँ से हिमालय की “चौखम्बा” पर्वत श्रेदियाँ देखि जा सकती हैं, समुद्र तट से १८१४ मीटर की ऊंचाई पर स्थित पौडी शहर
मनमोहक शहर है, पौडी से एक मनमोहक दृश्य इस चित्र मे दिख रहा है जिसमे हिमालय की श्रेणियों के दृश्य हैं और चौखम्बा पर्वत का दृश्य दिखाई दे रहा है।

पौडी मे अन्य मन्दिर इस पारकर से हैं-
देवी मंदिर — देवल गढ़
ज्वाल्पा देवी मंदिर - पौडी ( पाती सेन के नज्दीग)
दुर्गा देवी मंदिर– कोटद्वार से १३ कम। दूरी पर पूरी कोटद्वार मोटर मार्ग मे स्थित।
किशोरी मठ — १६८२ मे बना पौराणिक मंदिर
शंकर मठ — १७ वीं सदी का यह मंदिर आदि guru shankara charya ने बनाया है। यह श्रीनगर से ३ कम की दूरी पर है।

बिनसर महादेव — समुद्र तट से २४८० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर थैली सेन से २२ किलो मीटर की दूरी पर है, यह पुरानी शिल्पकला का अद्बुद सजीव चित्रण है।

कांदा मंदिर — पौडी से ४४ किलोमीटर और देहाल्चौरी से १ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
देवेल — पौडी से १४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

लाल धांग –yah mandir kotdwar haridwar marg par sthit hai, kotdwar se 27 kilometer ki doorie par sthit hai
hariyali devi — yah mandir 1480 meter ki unchai par sthit hai, pokhri gaon ke paas se paidal rasta hai।

राजेश्वरी देवी मंदिर– पौडी कोटद्वार मार्ग पर स्थित, यह जो लगभग ७२ किलोमीटर कोटद्वार से और २७ किलोमीटर पूरी शहर से है, यहाँ का “गिंदी” मेला प्रसिद्ध है।

डंडा नागराज मंदिर — पौडी से लगभग ४२ किलोमीटर दूरी पर स्थित है, अप्रिल मे प्रसिद्ध कौथिग (मेला) होता है।

खैरालिंग महादेव — मुन्द्नेश्वर मे स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर है।

संगुदा देवी मंदिर — यह मंदिर सत्पुली और बंघात के पास मे स्थित है।

गढ़वाल मंडल, उत्तराखंड के दो मंडलों मे से एक मंडल है, जो तिब्बत, हिमाचल परदेश , उत्तर परदेश से घिरा हिमालय के अंचल मे बसा हुआ है। ७ जिल्ले इसमे समाहित हैं जो इस परकार से हैं - पौडी गढ़वाल, टेहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्र पर्याग, उत्तर काशी, देहरादून, हरिद्वार। गढ़वाल मंडल का पर्शाश निक कार्यालय पौडी गढ़वाल मे है। चूँकि यह पर्वतीय क्षेत्र है इसलिए यहाँ पर घाटियाँ और पर्वत श्रेणियां हैं, मुख्य पर्वत श्रेणियां ” नंदा देवी (२५६६१ फीट), कमेत (२५४१३ फीट) ,त्रिसुल (२३३८२ फीट), बद्रीनाथ (२३२१० फीट), दुन्गिरी (२३१८१g फीट), केदारनाथ(२२८५३ फीट)।

पुरानी कथों के अनुसार कहा जाता है की गढ़वाल का नाम ५२ गडों के कारण पड़ा है, मुख्यतया दुर्गों को गढ़ कहा जाता है, जो इस परकार से हैं-
नाग्पुर्गढ़ - नागबंशी राजाओं का राज्य।
कोलिगढ़ - बिष्टों का राज्य।
रावल गढ़ -रावल जाति के राजाओं का राज्य।
फल्यांगढ़ - कल्याण जाति के ब्रह्मण राजाओं का राज्य।
बांवार्गढ़ -नागवंशी राणा राजाओं का राज्य।
कुइलिगढ़ (जोरासी गढ़)- सजवान राजाओं का राज्य
भार्पूर्गढ़
कुंजादी गढ़- राजा सुलतान सिंघ।
सिल्गढ़ - सज्वाद जाति के राजों का राज्य।
मूंग्रागढ़ -रावत जाति के राजाओं का राज्य.
रैका गढ़ -रमोला जाति के राजाओं का राज्य।
मौएल्या गढ़
उपू गढ़- चौहान राजाओं का राज्य।
नालागढ़- यही आज उत्तराखंड की राजधानी है(देहरादून)।
संकरी गढ़- राणा राजाओं का राज्य।
विरंल्या गढ़-रावत जाति के लोगों का राज्य।
चाँद पुर गढ़-सूर्य वंशी राजाओं का राज्य।
चौन्दा गढ़-चौन्दल जाति के राजाओं का राज्य।
तपो गढ़- तोपाल जाति के राजाओं का राज्य।
रानी गढ़- खाती जाति के राजाओं का राज्य।
श्री गुरुगढ़- पडियार जाति के राजाओं का राज्य।
बधन गढ़-बधान जाति के राजाओं का राज्य।
लोहाव गढ़-लोह्वा नेगी।
दशोली गढ़
कंडारी गढ़- कंडारी जाति के लोगों का राज्य।
धोना गढ़- धौंयल जाति
रतन गढ़-धमादा जाति।
एरासू गढ़
एडियागढ़-ईदिया जाति।
लंगूर गढ़
बाग़ गढ़- बागुर नेगी
बद्कोट- बगाद्वाल जाति।
भात्नाग-बिष्ट भोटिया
बंगढ़- ईदिया जाती
भारदार गढ़
चौन्द्कोट गढ़- चौन्द्कोट जाति
नयाल गढ़ - नयाल जाती
अजमेर गढ़ -पयाज जाती
कोडा गढ़- रावत जाती
सावली गढ़-
बदलपुर गढ़-
संगेला गढ़-बिष्ट जाती
जोत गढ़
गुजुदु गढ़
देवल गढ़
लोहा गढ़- लोड जाती\
जुल पुरा गढ़-
चंपा गढ़
दोदारा
भुवना गढ़
लोदन गढ़

यह बावन राज्य थे, आपस मे लड़ने के कारण पंवार बंश के राजा ने सबको परास्त कर एक क्षत्र राज्य स्थापित किया, जिनमे बावन गढ़ शामिल होने के कारण उसे गढ़वाल नाम दिया। वह राजा अजयपाल था।

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और झूम उठी घाटियाँ

Posted on 18 January 2010 by admin

बसन्त पंचमी बसन्त के आगमन का त्योहार है। जिसे गढ़वाल में बड़े मनोयोग से मनाया जाता है। बसन्त पंचमी की सुबह-सुबह औजी (मंगलवादक) अपने वाद्ययन्त्र (ढोल-दमाउ) के साथ घर-घर जाकर मंगल गीत गाता है व हरियाले (जौ) के पौधे को मांगलिक रूप में घर-घर बांटता है एवं देवताओं का आवाहन कर मंगल याचना करते हुये पहली हरियाली पंचनाम देवताओं, विष्णु, राम, शिव, नारायण तथा  वर्ष के बारह महीनों से स्वीकार करने की प्रार्थना करता है -

जौ ल्यौं पंचनाम देवतौ, जौ ल्यौ पंचमी का साल
जौ ल्यौ हरि राम शिव,जौ ल्यौ मोरी का नारैण

फलस्वरूप औजी को भेंट स्वरूप अनाज व भोजन दिया जाता है, सुबह-सुबह बच्चों को खेतों में पूजन सामग्री के साथ मंगल कामना हेतु पंचनाम देवताओं की पूजा करने भेजा जाता है जिसमें पांच सफेद पत्थरों को इनका प्रतीक मानकर पूजा की जाती है।

दिन में जहां पूजन सम्पन्न किया जाता है। वहीं रात्रि से शुरूआत होती है, एक परम्परा जोकि कई वर्षो से इन पर्वतीय घाटियों में मनायी जाती है। रात्रि में गितारों (गाने वालों) की टोली किसी एक घर में एकत्रित होती है तथा मिलकर झमैलो गीत गाती है। यह टोली एक मास तक प्रत्येक घर के आगन में क्रमबद्ध ढंग से गीत गाती है। इस टोली में स्त्री व पुरूश दोनों भाग लेते है। ठण्ड से बचने के लिए बीच में आग जलायी जाती है तथा दो दल बनाकर एक पद को दो बार दोहराया जाता है। आग के चारों ओर झूमते हुये गोल परिधि में मन्द गति से नृत्य किया जाता है। यह गीत बसन्त पंचमी से लेकर विशुवत संक्रान्ति तक गाये जाते है।

बसन्त ऋतु के लौटते ही गढवाल की धरती अपने मनमोहक सौन्दर्य से खिल उठती है ऐसे सुखद वातावरण में लोग अपनी अभिव्यक्ति को गीतों के माध्यम से व्यक्त करते हैं। जिसके अन्तर्गत वे स्थानीय देवताओं की वन्दना, थड़िया, चौकला व लोग गाथाओं आदि के माध्यम से अपने सुख-दुख को व्यक्त करते हैं।

एक मास तक यह गीत पर्वत घाटियों में गूंजते हैं। तथा संक्रान्ति के दिन इनका समापन होता है। गितारों को प्रत्येक घर से गुड़ व दक्षिणा दी जाती है तथा खुशी खुशी मंगल कामना के साथ त्योहार सम्पन्न होता है व अगले वशZ बंसत के आगमन के साथ इसकी प्रतीक्षा की जाती है।

उत्तराखण्ड से कुसुम भट्टkusum-uttarakhand150x15011

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वनस्पतियों व सुदूर संवेदन प्रणाली की जानकारी दी

Posted on 15 January 2010 by admin

पौड़ी गढ़वाल- केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के सहयोग से गढ़वाल विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के तत्वावधान में छात्र-छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि जाग्रत करने को लेकर आयोजित इंसपायर कार्यक्रम के चौथे दिन देश के विभिन्न वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों की जानकारियां दीं।

सुदूर संवेदन प्रणाली के बारे में बताते वनस्पति विज्ञानी प्रो. सीएम शर्मा ने कहा कि आधुनिक विज्ञान के हर क्षेत्र में सुदूर संवेदन म्यूनाधिक प्रयोग में लाया जा रहा है। नासा, इसरो सहित अन्य कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं सुदूर संवेदन के लिए संसाधनों के निर्माण परिस्करण और उनके उपयोग में लगे हुए हैं। आधुनिक सुदूर संवेदन प्रणाली मुख्यत: उपग्रहों से भेजे गए डिजीटल चित्रों के आधार पर इस प्रणाली का उपयोग मौसम की भविष्यवाणी, खनिजों की खोज, वनस्पति का मानचित्रीकरण, शत्रु के गढ़ पर सटीक हमला करना, शत्रु की खुफिया जानकारी प्राप्त करना आदि कार्यो के लिए भी किया जाता है। गढ़वाल विश्वविद्यालय में हैप्रिक संस्थान के प्रो. एमसी नौटियाल ने औषधीय वनस्पतियों की महत्ता और जरूरत पर कहा कि इनके संरक्षण की सख्त जरूरत है। गुरुकुल कांगड़ी विवि के प्रो. आरडी कौशिक ने रसायन विज्ञान के विभिन्न उपयोगों के बारे में बताया। कुरुक्षेत्र विवि के प्रो. पवन शर्मा ने विभिन्न तरह के विषाणुओं के बारे में रोचक ढंग से जानकारियां देते कहा कि विषाणु हजारों तरह के होते हैं परन्तु सभी महामारी वाले नहीं होते हैं। कुछ लाभदायक विषाणु भी होते हैं। गढ़वाल विवि में गणित विभाग के प्रो. आरसी डिमरी ने गणित के मूलभूत सिद्धांतों की साधारण भाषा में व्याख्या करते हुए गणित के कई दिलचस्प पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन कु. वंदना डिमरी ने  किया।

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उत्तराखंड का पंचायती राज एक्ट होना चाइये..

Posted on 09 January 2010 by admin

पौड़ी गढ़वाल- जिला पंचायत सदस्यों ने उत्तराखंड का अपना पंचायती राज एक्ट लागू करने की मांग की है।

जिला पंचायत सदस्यों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में कहा है कि राज्य का पंचायती राज एक्ट अब भी उत्तर प्रदेश के एक्ट पर चल रहा है। सदस्यों ने कहा कि ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने के लिए जिले की सर्वोच्च संस्था जिला पंचायत सदस्यों को उचित सम्मान अधिकार दिया जाए। इसके अलावा सदस्यों ने डीपीसी का अविलंब गठन करने, प्रत्येक जिला पंचायत सदस्य को 25 लाख रुपये सदस्य निधि के रूप में दिये जाने सदस्यों को उचित मानदेय देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनवरी माह में वार्ता के लिए समय भी मांगा है। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला पंचायत सदस्य दीपक भण्डारी, विजय लखेड़ा, मीरा रतूड़ी, मनोहर लाल पहाड़ी, सुमन गौड़, जगदीश सिंह बिष्ट, मदन सिंह बिष्ट, शिव सिंह गुसांई, शशि देवी, दीपा देवी, राजेश ध्यानी, सुरेन्द्र सिंह रावत, शोभा गुसांई, गंगा राम आदि शामिल है।

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अब महिला परिचालक संभालेगी पालिका सिटी बसों की कमान..

Posted on 06 January 2010 by admin

पौड़ी गढ़वाल।(श्रीनगर) नगरपालिका मलेथा से फरासू तक दो सिटी बसों का संचालन कर रहा है। सिटी बसों से पालिका को अनुमान के अनुसार आय नहीं मिल पा रही है। इसके लिए पालिका अब इन बसों पर महिला परिचालकों की नियुक्ति करेगी। नगरपालिका बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सिटी बसों में महिला परिचालकों की नियुक्तियां की जाय। यह नियुक्तियां सार्वजनिक विज्ञप्ति के माध्यम से की जाएंगी। भक्तियाना में गैस गोदाम के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए नगरपालिका निशुल्क भूमि भी पुलिस विभाग को उपलब्ध कराएगी। खेत संख्या 442 में से 7 मीटर चौड़ी और 10 मीटर लंबी भूमि प्रस्तावित पुलिस चौकी के लिए दी जाएगी। बैठक में बताया गया कि श्रीयंत्र टापू शहीद स्मृति पार्क में स्मारक निर्माण के लिए तीन बार निविदाएं की गयी, लेकिन कोई भी उचित निविदा प्राप्त नहीं हुई। नगरपालिका बोर्ड ने निर्णय लेते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष में कम समय को देखते हुए अब स्मारक का निर्माण कार्य किसी अनुभवी भवन निर्माण ठेकेदार को इस शर्त पर दे दिया जाएगा। शहर में पानी के पाइप लाइनों से होने वाली पानी की लीकेज समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इस समस्या के समाधान के लिए पालिका सभासद सुधांशु नौडियाल को प्रभारी पेयजल पालिका परिषद नियुक्त किया गया है।

E-mail :editor@bundelkhandlive.com
Ph-09415060119

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""काम की गारंटी है" हर गाव की गारंटी है"
                                         हर महिला पुरुष को दाम की गारंटी है""
महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
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