हल्द्वानी - पर्यावरणविद सुन्दरलाल बहुगुणा छोटे-छोटे राज्य बनाने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि है कि जितने राज्य बनेंगे उतने ज्यादा भी खर्चे बढ़ेंगे। खर्चो का बोझ किसी और पर नहीं बल्कि जनता पर ही पड़ेगा, जिससे समाज में गरीबी बढ़ेगी। पत्रकारों से वार्ता के दौरान यह बातें गुरुवार को पाल कालेज में बहुगुणा ने कहीं ।
पर्यावरणविद ने कहा कि छोटे-छोटे राज्य बनाने के बजाय गांवों को अधिकार दिये जायें। उनमें स्वराज कायम करने के लिए झगड़ा और दारु की दुकानें बन्द की जायें। इससे समाज में स्वत: परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी में दो विश्व युद्ध हुए और अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा। पानी के स्त्रोत खत्म होते जा रहे हैं। इसको लेकर सरकार को ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। बड़े उद्योग-धंधों से प्रदूषण बढ़ने का मुद्दा उठाने के बारे में वह बोले कि व्यवस्था केन्द्रीकृत न होकर विकेन्द्रीकृत होनी चाहिए।
बहुगुणा ने कहा कि इस जमाने का सबसे बड़ा राक्षस प्रदूषण है। शहरों में धूल, धुआं और शोर-शराबे का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह से दुनिया में आक्सीजन कम हो रही है, पानी की कमी हो रही है। मिट्टी को रासायनिक खाद इस्तेमाल करके नशीला बना दिया गया है, जो समाज के लिए शुभ संकेत नहीं। बिखरते परिवारों पर चिन्ता जताते हुए बहुगुणा ने कहा कि बड़े परिवार रहने से कई समस्याओं का समाधान खुद हो जाता है। अहंकार लुप्त होने के साथ परिवार की सुरक्षा की चिन्ता नहीं रहती। व्यक्ति में एक-दूसरे की चिन्ता करने की प्रवृत्ति बढ़ती है।













