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Archive | उत्तरकाशी

आईएएस ढाकवाला का हादसे में निधन

Posted on 08 May 2010 by admin

म.प्र. के वरिष्ठ प्रसासनिक अधिकारी जब्बार ढांकवाला और उनकी पत्नी श्रीमती तरलूग का आज एक सड़क हादसे में निधन हो गया। यह सड़क हादसा उत्तराखंड चांपा जिले के काण्डीखाल के पास हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री ढांकवाला गत दिनों अपनी पत्नी के साथ उत्तराखंड की तीर्थ यात्रा पर गए थे। आज वे कार द्वारा हरिद्वार से उत्तरकाशी के लिए जा रहे थे। इस दौरान उनकी कार लगभग एक हजार फिट गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में कार में सवार ढांकवाला दंपत्ति का निधन हो गया। ढांकवाला दंपत्ति के निधन की खबर आते ही प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।

गौरतलब है कि श्री ढांकवाला विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रहे हैं। हाल ही में उन्हें ग्वालियर राजस्व मंडल में पदस्थ किया गया था। वे मधुर स्वभाव के होने के साथ ही अच्छे साहित्यकार भी थे। ढांकवाला दंपत्ति के निधन की सूचना उनके पूना व बंगलौर में रहने वाले बेटों को दे दी गई है। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने श्री ढांकवाला और उनकी पत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री चौहान ने अपने शोक संदेश में कहा कि दुख की इस घड़ी में वे ढांकवाला परिवार के साथ हैं।

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जंगल बचाने में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका अहम

Posted on 11 March 2010 by admin

उत्तरकाशी - घास, लकड़ी के लिए जंगलों से ग्रामीण महिलाओं के अटूट रिश्ते को देखते हुए वनों को आग से बचाने में उनका सहयोग बेहद कारगर साबित हो सकता है। इस दिशा में सरकारी स्तर पर प्रभावी प्रयास की जरूरत है। हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान द्वारा मातली में वनागि्न नियन्त्रण में महिलाओं की भूमिका विषय पर आयोजित गोष्ठी के दौरान उक्त विचार सामने आए।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी डा. आई.पी सिंह ने स्वीकारा कि जंगलों को आग बचाने में स्थानीय ग्रामीण की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने जंगलों को आग से बचाने तथा आग लगने पर बुझाने के उपायों की जानकारी दी। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि वनों में आग का प्रमुख कारण व्यवसायिक दोहन है। चीड़ वनों को आग का कारण बताकर पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति को गलत बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि चीड़ की पत्तियों का व्यवसायिक उपयोग किया जाना चाहिए।

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नेशनल पार्क में प्रवेश, कैंपिंग हुई महंगी

Posted on 05 March 2010 by admin

नेशनल पार्क में प्रवेश एवं कैंपिंग के साथ ही वन विभाग के विश्राम गृहों में ठहरने के इच्छुक पर्यटकों को अब पहले की तुलना में तीन से चार गुना शुल्क चुकाना होगा। ईको टूरिज्म को आय के स्रोत के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने जनवरी 2010 से शुल्क वृद्धि का आदेश जारी किया है।जिले में गंगोत्री नेशनल पार्क, गोविन्द पशु विहार और गोविन्द नेशनल पार्क के साथ ही वन विभाग के नियन्त्रण वाले डोडीताल, असी गंगा क्षेत्र एवं विभिन्न ट्रैक पर हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। इन क्षेत्रों में प्रवेश और कैंपिंग के साथ ही वन विभाग के विश्राम गृहों में ठहरने के लिए वन विभाग द्वारा शुल्क वसूला जाता है।

शासनादेश संख्या 3917/-2-2009-12(7)/2003 के अनुसार ईको टूरिज्म को आय के स्रोत के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से इन शुल्कों में बढ़ोत्तरी करने के आदेश जारी कर इसे जनवरी 2010 से प्रभावी बनाया गया है। शासनादेश के अनुसार पूर्व में वसूले जा रहे शुल्कों में तीन से चार गुना तक बढ़ोत्तरी की गई है। इससे वन विभाग के राजस्व में बढ़ोत्तरी होती है या नहीं यह तो कहना मुश्किल हैए लेकिन पर्यटकों की जेबें हल्की होना तय है। प्रभागीय वनाधिकारी डा.आई.पी सिंह का कहना है कि अभी तक वसूले जा रहे शुल्क से इन सेवाओं में लगे कर्मचारियों की तन2वाह निकलना भी मुश्किल था। पर अब शुल्क बढ़ाए जाने से सेवाओं में भी सुधार होगा।

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मनरेगा : नहीं मिला जाब कार्ड का लाभ

Posted on 14 January 2010 by admin

घनसाली. जाखणीधार में ग्राम पंचायत छेटी के ग्रामीणों को मनरेगा के अंतर्गत रोजगार न दिए जाने पर ग्रामीणों ने बैठक कर विकासखंड के खिलाफ रोष प्रकट किया। बाद में ग्राम विकास अधिकारी व क्षेत्रीय पटवारी ने कुछ लोगों हौज तथा गूल निर्माण कार्य देकर शांत किया , साथ ही ग्रामीणों के 110 आवेदन भी लिए गए।

मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीणों के जॉब कार्ड तो बनाए गए लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उक्त ग्रामीणों को रोजगार नहीं दिया गया। नाराज ग्रामीणों ने गांव में बैठक कर विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया और मौके पर बुलाए गए ग्राम विकास अधिकारी व क्षेत्रीय पटवारी से रोजगार की मांग की। घंटे भर चली हंगामेदार बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि या तो उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जाए या फिर जॉब कार्ड के अनुसार ग्रामीणों को काम दिया जाए। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए बाद में किसी तरह सर्वसम्मति से ग्राम विकास अधिकारी तथा पटवारी ने गांव के कुछ जॉब धारकों को हौज तथा गूल निर्माण का कार्य देकर शांत किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मनरेगा के अंतर्गत काम न मिला तो वह विभाग के खिलाफ आंदोलन को बाध्य होंगे। उधर खंड विकास अधिकारी एनडी सकलानी ने बताया कि उक्त गांव में प्रधान सक्रिय न होने के कारण अभी तक लोगों द्वारा आवेदन नहीं किए गए थे जिस कारण लोगों को काम नहीं मिला। सोमवार को गांव से 110 आवेदन प्राप्त हुए हैं। बैठक में एमएल रतूड़ी, सत्यप्रसाद रतूड़ी, मकान सिंह, भामा देवी, रूकमणी देवी, मार्कडेय प्रसाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

editor@uttarakhandlive.in

PH-9415060119

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                                         हर महिला पुरुष को दाम की गारंटी है""
महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
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