देहरादून - डीएम ने जिले के सभी SDM बदले , Jharna Kamthan होंगी City Megistrate. Manoj Kumar होंगे SDM Mussoorie. Vinod Giri होंगे SDM Sadar, खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "uttarakhandlive.in" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@uttarakhandlive.in पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms

Archive | पर्यावरण

प्रदूषण रहित, नहाने योग्य है गंगाजल

Posted on 02 February 2010 by admin

गंगा प्रदूषण नियन्त्रण इकाई ने प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड की रिपोर्ट नकारी

हरिद्वार - गंगा प्रदूषण नियन्त्रण इकाई के जी.एम, एस.सी गुप्ता ने प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (पीसीबी) की  हाल मे जारी रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। गुप्ता ने कहा कि हरकी पैड़ी से कनखल में दक्षद्वीप और सिंहद्वार तक स्नान घाटों पर गंगाजल पूरी तरह से प्रदूषण रहित और  नहाने योग्य है।  गुप्ता ने कहा कि बोर्ड की रिपोर्ट के लिए जिस जगह से सैंपल लिए गए वहां स्नान होता ही नहीं है। वहां सीवर का ओवर फ्लो मिलता है। हरकी पैड़ी से ऊपर और फिर सीधे मिस्सपुर में सैंपल लेने का औचित्य ही नहीं है। हरकी पैड़ी, डामकोठी, सिंहद्वार तथा दक्ष मन्दिर के घाटों से सैंपल लिया जाता तो गंगाजल की शुद्धता की वास्तविक स्थिति का पता चल पाता। पीसीबी के खुलासे के बाद मेलाधिकारी कुंभ आंनदबर्धन ने गंगा प्रदूषण नियन्त्रण इकाई के अधिकारियों से बातचीत की और गंगा में प्रदूषण के सम्बंध में रिपोर्ट तलब की। गंगा प्रदूषण नियन्त्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक वाई.के मिश्रा ने जीएम को गंगा में प्रदूषण के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दे दी है।

जीएम गुप्ता का कहना है कि भारत सरकार पीसीआरआई से नियमित गंगाजल की गुणवत्ता की सैंपलिंग लेती है। पीसीआरआई द्वारा पावनधाम, हरकी पैड़ी और डामकोठी से सैंपल लेकर गंगाजल की जांच की जाती है। भारत सरकार के निर्देश पर कुंभ के शाही स्नान पर्वो के बाद भी पीसीआरआई सैंपल लेकर गंगाजल की गुणवत्ता की जांच कर केन्द्र को अपनी रिपोर्ट देगी। जीएम गुप्ता ने कहा कि वह इस सम्बंध में पीसीबी को एक पत्र भेज रहे हैं तथा मेलाधिकारी को भी वास्तविक स्थिति की जानकारी दे दी है।

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सामाजिक संस्थाओं को सूचना उपलब्ध नही कराने पर कड़ा एतराज

Posted on 31 January 2010 by admin

बाजपुर- अखिल भारतीय अनुसूचित जाति एवं शोषित वर्ग उत्थान समिति के महामन्त्री डोरी लाल सागर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के जिले में हुये भ्रमण कार्यक्रम की सूचना सामाजिक संस्थाओं को नही उपलब्ध कराये जाने पर कड़ा एतराज प्रकट किया है।

श्री सागर ने इस संबंध में आयोग को एक शिकायती पत्र प्रेषित करते हुये आग्रह किया है कि आयोग अपने भ्रमण की सूचना समुचित माध्यम से जनता में प्रसारित कराये ताकि स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसे भ्रमण कार्यक्रमों को छुपाने की मंशाओं पर पानी फिर सके और सबंधित लोग अपने पक्ष को प्रस्तुत कर सकें। श्री सागर ने सन्त  रविदास जयन्ती के राजपत्रित अवकाश को राज्य में निबंधित अवकाश में प्रतिबंधित कर दिये जाने पर भी कड़ा रोष जाहिर किया। उन्होंने आयोग से सरकार पर आरक्षण के मानकों को नही चलने का भी आरोप लगाया।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
E-mail :editor@bundelkhandlive.com
Ph-09415060119

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प्रदूषण सभी के लिए चिंता का विषय - विशेषज्ञ

Posted on 27 January 2010 by admin

रुड़की- अनवरत शिक्षा केंद्र में ट्रेनिंग कोर्स आयोजित किया जा रहा है। ट्रेनिंग कोर्स के अंतर्गत विशेषज्ञों ने पर्यावरण संतुलन पर जोर दिया। साथ ही विशेषज्ञों ने प्रदूषण से स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के केमिकल डिपार्टमेंट की ओर से अनवरत शिक्षा केंद्र में एनवायरनमेंट हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजमेंट विषय पर ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जा रहा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के केमिकल डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अजीत कुमार शर्मा ( डीजीएम,भेल)  ने प्रदूषण होने के प्रमुख कारणों एवं उनकी पहचान के विषय में प्रकाश डाला। शर्मा ने लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को समाज के लिए एक चुनौती बताया। देहरादून आई.आई.पी. से सेवानिवृत्त जी.एस. डंग ने तरल पदार्थो से होने वाले प्रदूषण के बारे में जानकारी दी। प्रो. आई.एम मिश्रा ने बताया कि लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में सभी के लिए चिंता का विषय होगा। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों से पड़ने वाले प्रभाव एवं इसे रोकने के उपायों के बारे में जानकारी दी।

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प्रदूषण के कारण गंगा में डुबकी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक -एनजीओ अध्ययन

Posted on 18 January 2010 by admin

देहरादून-  स्वम् सेवी संगठन द्वारा किए गये एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हरिद्वार में गंगा का पानी, स्नान के लिए तय पैमानों पर खरा नहीं है।

देहरादून के एनजीओ पीपल्स साइंस इंस्टिट्यूट ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि गंगा में विभिन्न नालों के जरिए बिना ट्रीटमेंट वाला कचरा आदि लगातार पहुंच रहा है। इस कारण हुए प्रदूषण से पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि यह सेंट्रल पल्युशन बोर्ड के मानकों पर भी खरा नहीं उतरता।

इस नतीजे तक पहुंचने के लिए इंस्टिट्यूट ने हरिद्वार में ऐसी जगहों को चुना जहां पर प्रदूषित नालों का पानी गंगा में बहाया जाता है। 2 और 3 जनवरी को इन तीन जगहों से पानी के सैंपलों को इकट्ठा किया गया। सबसे ज्यादा खराब स्थिति ज्वालापुर के नाले के पास पाई गई। इस नाले से गंगा में बहाए जाने वाले पानी में प्रति मिलीलीटर 40.6 मिलियन फेकल कॉलिफॉर्म (जैसे ई कोलाई बैक्टीरिया) पाए गए। इसी तरह सप्तऋषि, हर की पौड़ी, जगजीतपुर में भी फेकल कॉलिफॉर्म की मात्रा 1000, 1500 और 7.5 मिलियन प्रति 100 मिलीलीटर था। जबकि पल्यूशन बोर्ड का मानक 500 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर है।

इन आंकड़ों से साफ झलकता है कि हरिद्वार कुंभ से पहले प्रशासन ने गंगा की सफाई के प्रति कितनी गंभीरता दिखाई होगी। पीएसआई एनवायरनमेंट क्वॉलिटी मॉनिटरिंग ग्रुप के हेड डॉ. अनिल गौतम जानकारी दी है कि प्रदूषण के कारण गंगा में डुबकी लगाने वालों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।  डॉ.गौतम के अनुसार, हमने इस बारे में पहले भी राज्य के सभी विधायकों और मंत्रियों को इस बारे में जानकारी दी थी और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। बावजूद इसके कुंभ से पहले गंगा की सफाई के लिए खास कदम नहीं उठाए गए।

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विकास व पर्यावरण के संतुलन में उत्तराखंड आगे

Posted on 14 January 2010 by admin

देहरादून- विकास गतिविधियों और पर्यावरण संतुलन में उत्तराखंड देश में पहले स्थान पर है। एक गैर सरकारी संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट फाइनेंस (सीडीएफ)की रिपोर्ट में एन्वायरमेंट सस्टेनेबल इंडेक्स (ईएसआई)यानी पर्यावरण टिकाऊ सूचकांक की दृष्टि से उत्तराखंड और उत्तर पूर्व के राज्य अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम देश में बेहतर स्थिति में हैं। जबकि महाराष्ट्र, गुजरात पंजाब और यूपी निचली पायदान पर हैं।

सीडीएफ ने चालीस पर्यावरण संसूचकों और नौ उपसंकेतकों के जरिए यह इंडेक्स तैयार किया है। इंडेक्स तैयार करने से पहले देश के सभी राज्यों में वायु की गुणवत्ता, पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता, भू-उपयोग, कृषि, वन, जैव विविधता,अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य पर प्रभाव, जनसंख्या दबाव और प्रदेश के पर्यावरण बजट का अध्ययन किया गया। इसमें हिमाचल प्रदेश, केरल, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिमी बंगाल दूसरे, जबकि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा तीसरे पायदान पर हैं। सीडीएफ की निदेशक जेसिका सेडान वैलेक के मुताबिक इंडेक्स से पता चलता है कि राज्यों में आर्थिक विकास और पर्यावरण के क्षेत्र में आपस में कितना संतुलन है। जेसिकां ने बताया कि यह इंडेक्स हर वर्ष जारी किया जाएगा। ताकि नीति नियंता अपनी नीतियां निर्धारित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखें।

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