Posted on 24 June 2010 by admin
साउथ अफ्रीका की डॉक्टर सॉनेट एहलर्स ने ऐसा फीमेल कॉन्डोम डेवलप किया है जिसके इस्तेमाल से बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों पर रोक लग सकती है। बलात्कार की कोशिश करने वाले पुरुष को अपनी इस हरकत की सजा मिलेगी। बलात्कार की कोशिश करने के बाद उसे दिन में तारे नज़र आने लगेंगे और उसके गुप्तांग में बेहद तेज दर्द होगा। पुरूष को ज़माने भर की जग-हसांई मिलेगी सो अलग से।
‘रेप एक्स’ (यानि बलात्कार पर कुल्हाड़ी) नाम के इस कॉन्डम की खासियत यह है कि इसमें कांटों की एक कतार जैसी लगी होती है। अगर कोई पुरुष बलात्कार करने की करता है और महिला की योनि में अपना गुप्तांग प्रविष्ट करवाता है तो इस अनोखे कॉन्डोम पर लगे दांतों जैसे कांटे उसके पेनिस को जकड़ लेते हैं। पुरूष अपने पेनिस को निकालने की जितनी ज्यादा कोशिश करेगा, इन कांटों की पेनिस पर पकड़ और भी ज्यादा गहरी होती जाएगी। बलात्कारी पुरूष ना तो टॉयलेट जा सकेगा और न ही चल-फिर पाएगा।
ये चमत्कारी कॉन्डोम ‘रेप एक्स’ सिर्फ डॉक्टर की मदद से ही निकलवाया जा सकेगा। डॉक्टर एहलर्स ने बताया कि चूंकि ये कांटे घाव नहीं बनाते इसलिए पीड़ित महिला को हमलावर के शरीर से निकलने वाले किसी भी प्रकार के द्रव के संपर्क में आने का खतरा नहीं रहता है।
इस कॉन्डम को 20 बरसों के रिसर्च के बाद बनाया गया है। फिलहाल ये ट्रायल पीरियड में है लेकिन जल्द ही यह लगभग 100 रुपये में मिलने लगेगा। यह उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें जोखिम भरी जगहों पर जाना हो।
Posted on 07 March 2010 by admin
रुड़की - एस.एन .बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंस और इण्डियन सेंटर फॉर स्पेस फ़िजिक्स, कोलकत्ता के रिसर्च साइंटिस्ट सन्दीप के. चक्रवर्ती ने कहा कि जीवन की उत्पत्ति एक सरल प्रक्रिया है और केमिकल मॉलीकूल्स इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्टार फारमेशन के दौरान कई के मिकल मॉलीकूल्स निकलते हैं, जो लाइफ के लिए अति आवश्यक हैं।
चक्रवर्ती आईआईटी के रसायन विभाग की ओर से आयोजित अन्तरराष्ट्रीय कार्यशाला में विचार व्यक्त कर रहे थे। आईआईटी के ओ.पी. जैन सभागार में आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन भी वैज्ञानिकों ने केमिकल इवोल्यूशन एण्ड ओरीजन ऑफ लाइफं को लेकर मन्थन किया। इस दौरान रिसर्च साइंटिस्ट सन्दीप के. चक्रवर्ती ने इवोल्यूशन ऑफ काम्पलेक्स मॉलीकूल्स डज्ञूरिंग द कोलैप्स ऑफ मॉलीकूलर क्लाइड एण्ड स्टार फारमेशनं पर विचार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि स्टार फारमेशन में एमीनो एसिड, आर.एन.ए. डी.एन.ए. सहित कई केमिकल मॉलीकूल्स निकलते हैं जो जीवन की उत्पत्ति में अहम है। उन्होंने स्टार फारमेशन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। कहा कि इसमें लगभग एक करोड़ वर्ष का समय लगता है। इस दौरान कई मॉलीकूल्स खत्म भी हो जाते हैं। वहीं फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी अहमदाबाद से आए रिसर्च साइंटिस्ट बी.जी. आनन्दाराव ने मॉलीकूलर डाग्नोस्टिक इन आस्ट्रोनोमीं पर प्रकाश डाला। इससे पहले कार्यशाला के आयोजक और आईआईटी रुड़की में रसायन विभागाध्यक्ष डा. कमालुद्दीन ने कहा कि मंगल ग्रह पर हीमेटाइट और पानी मिला है जो केमिकल इवोल्यूशन और मॉलीकूल प्रॉड्क्सन में भी दर्शाया गया है। इसके अलावा उन्होंने अन्य ग्रहों पर भी जीवन की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला में देश-विदेश से लगभग 100 साइंटिस्ट हिस्सा ले रहे हैं। इसमें अमेरिका, रूस, यू.के., ईरान आदि देशों के साइंटिस्ट भी शामिल हैं।