देहरादून - डीएम ने जिले के सभी SDM बदले , Jharna Kamthan होंगी City Megistrate. Manoj Kumar होंगे SDM Mussoorie. Vinod Giri होंगे SDM Sadar, खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "uttarakhandlive.in" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@uttarakhandlive.in पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms

Archive | विचार

पानी के लिए बेहाल देश………

Posted on 06 April 2010 by admin

बूंद-बूंद पानी को तरसता देश कोई लेकिन पानी की राजनीति ने प्रक्रति के इस स्वभाव को भुलाने की अक्षम्य गलती की है। इसलिए लोग बूंद-बूंद पानी के लिए बेहाल है। एक बड़ी गलती हमसे यह हुई कि हमने पानी रोकने के समय सिद्ध और स्वयं सिद्ध तरीकों को पुराना या परम्परागत कहकर छोड़ दिया।

भारत के पास विश्व की 2.45 प्रतिशत् धरती है और लगभग 17 प्रतिशत् आबादी। 1947 में देश के 223 गाव में पानी कम था। अब उनकी संख्या लगभग 90 हजार हो गई है। 90 प्रतिशत् ग्रामीण आबादी गहरे या उथले भूमिगत जल पर निर्भर है। देश की 80 प्रतिशत् आबादी भू-जल का अनियन्त्रण दोहन कर रही है। भारत वर्ष की आबादी दिन भर दिन बढ़ती ही जा रही है। परन्तु पानी के लिए आज तक सटीक कदम नहीं उठाया गया। जिससे आने वाले संकट से बचा जा सके।

हमारा देश कभी तो पानी की मार झेलता है तो कभी पानी की किल्लत को। अगर सही योजनाबद्ध तरीके से नदियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाए तो ना पानी की मार और न ही किल्लत का सामना करना पड़ेगा परन्तु हमारे देश के कई राजनीतिज्ञ ही विकास में सबसे बड़ी बाधा डालने वाले है जो काम 2 वर्ष मे पूरा होना चाहिए उसे 4 वर्ष से पहले पूरा होने ही नहीं देते। हमारे देश की विकास दर बहुत धीमी गति से चल रही है। अगर राजनीतिज्ञ विकास में रोड़ा न बने तो यह देश बहुत तेज गति से विकास करे। जिस तरह अन्य देश बहुत तेज गति से विकास कर रहे है। उदाहरणार्थ चीन की विकास दर भारत देश के मुकाबले में बहुत ज्यादा है परन्तु चीन का बहुत सारा भू-भाग लगभग 2/3 भाग जो कि निर्जन है कहने का तात्पर्य है कि वह भाग जहां पर लगभग सारा वर्ष बर्फ पड़ी रहती है जहां पर जीवन व्यतीत करना काफी कठिन है। लेकिन फिर भी चीन अपने विकास का झण्डा फहराये हुए है। पता नहीं कि हमारा देश भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की मार कब तक झेलेगा।


Vikas Sharma
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कैलास मानसरोवर यात्रा

Posted on 05 April 2010 by admin

विश्व प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर तीर्थयात्रा केवल हिन्दुओं के लिए ही नहीं बल्कि अन्य धर्मावलंबियों के लिए भी आस्था व श्रद्धा का पावन केन्द्र है। दिल्ली से 865 किलोमीटर की यह यात्रा सदियों से चल रही है। आलौकिक अनुभूति कराने वाली इस यात्रा में प्रतिवर्ष पूरे भारत वर्ष से लोग शामिल होते हैं।

05_2009_9-kailashman-1_1243011005जून से शुरू होने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारी छह महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा इसका संचालन किया जाता है। 30 दिन की इस यात्रा की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा की जाती है। कठिन मार्ग और लंबी दूरी के बाद भी तीर्थयात्री हिमालय की श्रृंखलाबद्ध चोटियों और नैसर्गिक सौन्दर्य का लुत्फ उठाते हुए आगे बढ़ते रहते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मारी जाने वाली यह यात्रा अत्यंत रमणीक है। इस वर्ष एक जून से कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू हो रही है। इसमें प्रतिवर्ष की तरह 16 दल जायेंगे। प्रत्येक दल में अधिकतम 44 यात्री होते हैं। भारत सरकार की ओर एक उच्च अधिकारी को प्रत्येक दल में लाइजन आफिसर के रूप में भेजा जाता है। 18 वर्ष से अधिक उम्र का भारत का नागरिक ही इस यात्रा में शामिल हो सकता है। 30 दिन की इस यात्रा में तीन दिन दिल्ली में रुकना होता है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही यात्रा में जाने की अनुमति मिलती है। दिल्ली से यात्रा शुरू करने के बाद कुमाऊं में यात्री केएमवीएन के पर्यटक आवासगृहों में ठहरते हैं। रास्ते में मंदिरों के दर्शन करते हुए बम-भोले के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। काठगोदाम, अल्मोड़ा, चौकोड़ी, धारचूला, बूंदी, गुंजी, कालापानी, नावीढांग, लिपुलेख, ताकलाकोट से दारचिन, डेराफू व कुगूमठ, जुटुलपुक, दारचिन व छ्युगोम्पा, कुगुमठ से कैलाश की परिक्रमा की तैयारी शुरू हो जाती है। 22 वें दिन दारचिन से छयुगोम्पा होकर ताकलाकोट में दोनों दल एक होकर यज्ञ, स्नान के बाद दोपहर में राकसताल और पीछे कैलाश के दर्शन करते हैं। कैलाश की परिक्रमा में 55 किलोमीटर चलना पड़ता है। 23 वें दिन ताकलकोट से खोजरनाथ और 25 किलोमीटर दूर करनाली घाटी में स्थित खोजरनाथ मठ के दर्शन कराये जाते हैं। यहां पर बुद्ध मंदिर है। इसमें राम-लक्ष्मण व सीता की मूर्तियां विद्यमान हैं। 24 वें दिन ताकलकोट से लीपुपास व नावीढांग से कालापानी को वापस लौटते हैं। फिर गुंजी, बूंदी, धारचूला होते हुए वापस आ जाते हैं।

मानसरोवर के उत्तर में कैलास पर्वत माला और कैलाश शिखर है। दक्षिण में गुरला पर्वत माला और गुरला शिखर है। इस क्षेत्र से उत्तर की चार बड़ी नदियां करनाली, सतलज, ब्रह्मापुत्र, सिन्ध निकलती है। पश्चिम तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर भारतीय मन से कभी अलग नहीं हुये। इस मानसरोवर के कारण ही कुमाऊं को मानस खंड कहा जाना प्रारंभ हुआ। मान्यता के अनुसार मानसरोवर को ब्रह्मा के मस्तिष्क से रचा हुआ माना जाता है। इसकी खोज राज गुरला मान्धाता ने की। जिनके नाम से सर्वाधिक ऊंचा पर्वत गुरला है। तीर्थयात्रा के सफल संचालन के लिए तैयारी जोरशोर से चल रही हैं।


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आम लोगों तक शोध की जानकारी पहुंचा जागरूक करे

Posted on 19 March 2010 by admin

उत्तरकाशी - राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय आडिटोरियम में जैव तकनीकी के विकास एवं जलीय जैव विविधता संरक्षण में इसके महत्व विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार बृहस्पतिवार को संपन्न हुई, सेमिनार में शोध पत्रों के माध्यम से प्रदूषण आदि विभिन्न कारणों से नदियों एवं इनके जलीय जीव तन्त्र पर मण्डरा रहे खतरे की ओर इशारा किया गया। शोध को आम जनता तक पहुंचाकर उन्हें जागरूक करने के साथ ही इसके आधार पर सरकारी नीतियां तय करने की आवश्यकता जताई गई।

दो दिनों से महाविद्यालय आडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार बृहस्पतिवार को संपन्न हुई। सेमिनार के अवसर पर महाराष्ट्र से आए एस.बी निकल्जे ने टेक्सटाइल मिलों से निकलने वाले प्रदूषित जल से तथा हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान की हिमला ने बांध परियोजना से जलीय जीव तन्त्र पर पड़ रहे दुष्प्रभावों की ओर लोगों का ध्यान खींचा।

हरिद्वार के त्रिभुवन चन्द्र ने जलीय पक्षियों, भौतिक विज्ञान की डा.सुमित्रा श्रीवास्तव ने बायोसेंसर, कोटद्वार के एस.पी बुडोला ने महाशीर मछली पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही अर्जुन पुरस्कार विजेता डा. र्षवन्ती बिष्ट ने स्लाइड शो के माध्यम से गंगोत्री हिमालय क्षेत्र के ईकोसिस्टम के बारे में बताया। गंगोत्री के तीर्थ पुरोहित ने गंगा के महत्व की जानकारी दी तो पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल ने पौधरोपण की अपील की।

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राम की ही नही, रावण की पूजा होती है यहा

Posted on 27 February 2010 by admin

यूं तो देश के कुछ हिस्सों में रावण की अराधना कोई नई बात नहीं है लेकिन भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या से चंद मीलों के फासले पर स्थित उत्तर प्रदेश के देवरिया में रावण के प्रति लोगों की आस्था गहराती जा रही है।

जिले के कुछ हिस्सों में रावण प्रेम का आलम यह है कि यहां दशानन के भव्य मंदिर निर्माण की तैयारियां जोर शोर से की जा रही हैं। इसके लिए क्षेत्रीय लोगों का साथ देने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कमर कस ली है। दशानन के प्रति लोगों का रूझान पैदा करने के लिए शहर के देवर ही मंदिर के पास सांई आश्रम में रावण की पूजा अराधना अनवरत जारी है।

रावण भक्त सामाजिक कार्यकर्ता दिग्विजय नाथ चौबे का कहना है कि रावण भक्तों में पुरूष ही नहीं महिलाओं की भी खासी तादाद है जो हर रोज रावण की अराधना करती है और उन्हे इससे आत्मिक संतुष्टि मिलती है।

चौबे का कहना है कि रावण मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाने का काम शुरू हो चुका है और उन्हे आशा है कि अगले कुछ माह के भीतर मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए रावण की छोटी छोटी मूर्तियां बनाने का काम भी शुरू हो चुका है।

उन्होंने कहा कि दशहरे के दिन क्षेत्र में अब रावण का पुतला दहन नहीं होगा बल्कि इस दिन महा प्रकांड पंडित की शोभा यात्रा निकाली जाएगी।


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पुरुष ऐसी महिलाओं को पसंद करते हैं, जिस पर वे विश्वास कर सकें..

Posted on 15 February 2010 by admin

लड़के भले ही साइज जीरो मॉडलों को घंटों निहारते रहें, लेकिन जहां पत्नी की बात आए, वहां उन्हें विचारवान और मृदु व्यवहार वाली लड़की की ही याद आती है।
एक नए शोध ने एक बार फिर इस बात को प्रमाणित कर दिया है कि पुरुष ऐसी महिलाओं को पत्नी के तौर पर पसंद करते हैं, जिस पर वे विश्वास कर सकें और जो उनके अभिभावकों के साथ अच्छे से निभा सके।
डेली मेल ने शोधकर्ता वेबसाइट यूकेडेटिंग डॉट कॉम के स्टीफन रोल्ट के हवाले से कहा साइज जीरो मॉडल एक मिथक है। वास्तविकता यह है कि पुरुष ऐसी लड़की को पसंद करते हैं, जिस पर वे विश्वास कर सकें। उन्होंने कहा एक पुरुष आज भी यह चाहता है कि जब जीवनसाथी चुनने की बात आए तो मम्मी की रजामंदी मिल जाए।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि महिलाएं ऐसे पुरुषों से दूर रहना पसंद करती हैं, जो शराबी, स्वार्थी और हिंसक व्यवहार वाले हों। रिपोर्ट के अनुसार पुरुष अश्लील और अविश्वसनीय व्यवहार वाली महिलाओं से दूर भागते हैं।

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सोनिया गांधी का प्यार पहली नजर का प्यार था।

Posted on 15 February 2010 by admin

{सोनिया गांधी लाभ के किसी पद पर आसीन नहीं, और यही उनका अपने प्यार के प्रति सबसे बड़ा प्रतिदान है}19sonia1-1_1250695810_m
जब पहली बार सोनिया ने एक हैंडसम इंजीनियरिंग स्टूडेंट को देखा तो वह मंत्रमुग्ध रह गईं। दोनों की नजरें मिलीं, और दिल धड़क उठे। बाद में सोनिया ने अपने परिवार वालों को पत्र में लिखा- मैं एक भारतीय लड़के से प्यार करती हूं।
प्यार किस्मत बदल देता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संदर्भ में यही कहा जा सकता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाती राजीव से उनकी मोहब्बत ने उन्हें सात समुंदर पार, एक अनजान देश में पहुंचाया। यहां एक बार पहुंची तो यहीं की होकर रह गईं।
राजीव गांधी से सोनिया का प्यार पहली नजर का प्यार था। वेनेटो, इटली में जन्मी सोनिया से राजीव गांधी की मुलाकात कैंब्रिज में हुई। सोनिया यहां अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई करने गई थीं, और राजीव ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ रहे थे। वहीं के एक ग्रीक रेस्त्रं में सोनिया ने राजीव को पहली बार देखा था।
सोनिया एक साधारण परिवार की लड़की थीं, और उन दिनों पढ़ने के साथ-साथ कैंब्रिज में पार्टटाइम काम भी कर लेती थीं। जब राजीव से वह पहली बार मिलीं, तब वह उस रेस्त्रां में काम करती थीं। जब पहली बार सोनिया ने एक हैंडसम इंजीनियरिंग स्टूडेंट को देखा तो वह मंत्रमुग्ध रह गईं। दोनों की नजरें मिलीं, और दोनों के दिल धड़क उठे। बाद में सोनिया ने अपने परिवार वालों को पत्र में लिखा- मैं एक भारतीय लड़के से प्यार करती हूं। वह एक स्पोर्ट्समैन है। नीली आंखों वाले ऐसे ही राजकुमार का मैं हमेशा से सपना देखती थी। इसके बावजूद सोनिया ने अपने दिल का हाल राजीव पर जाहिर होने नहीं दिया।
उधर राजीव भी सोनिया पर मर मिटे थे। प्यार का इजहार करने में उन्हें भी वक्त लगा। पर एक बार इजहार किया तो सात फेरों पर ही बात खत्म की। तब तक सोनिया को मालूम चल चुका था कि राजीव भारत के इतने बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
राजीव और सोनिया की मुलाकात 1965 में हुई थी और दोनों ने तीन साल बाद यानी 1968 में विवाह किया। इसके बाद सोनिया भारत की ही होकर रह गईं। 1970 में उन्होंने राहुल को, और 1972 में प्रियंका को जन्म दिया। हालांकि राजीव गांधी राजनीति में उतरे, और मां एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री भी बने, पर सोनिया राजनीति से दूर रहीं।
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने देश की राजनीति में उतरने का फैसला किया। यह उनके प्यार का प्रतिदान था। पति राजीव जिस देश से प्यार करते थे, उसके हित के बारे में सोचते थे, उसी देश की सेवा के लिए सोनिया गांधी ने यह फैसला किया। अपने प्यार के प्यार को अंगीकार करना ही तो प्यार में सबसे बड़ा समर्पण है।
 

Vikas Sharma
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वेलेन्टाइन डे पर बजरंगी और संडे पड़े भारी

Posted on 15 February 2010 by admin

दुनिया भर में भले ही वेलेन्टाइन डे धूमधाम से मनाया गया हो पर हल्द्वानी में बजरंग दल कार्यकर्ताओं और शिव सैनिकों के डर से प्रेमी जोड़े खुलेआम किसी भी स्पॉट पर नजर नहीं आए। रही, सही कसर संडे ने पूरी कर दी।

रविवार को प्रेमी जोड़ों को मोहब्बत का इजहार करने के लिए पर्दे के पीछे ही रहना पड़ा।

इस दौरान स्कूल कॉलेज बंद रहने से भी सुनसानी छाई रही। दिन भर केवल शिव सैनिक और बजरंग दल कार्यकर्ता ही शहर की सड़कों पर नजर आए। इस दौरान उन्होंने गौला बैराज से लेकर शहर की तमाम गिफ्ट शॉप्स और साइबर कैफे की निगरानी की। इस दौरान उन्होंने वेलेन्टाइन का पुतला भी फूंका। हत्थे तो उनके कोई जोड़ा नहीं लग पाया पर उनके कारण दिनभर शहर में जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। जिससे आने जाने वालो को भी दिक्कत हुई।

वेलेन्टाइन डे के दिन स्कूल कॉलेज बन्द रहने के कारण शरारती तत्वों को भी युवतियों पर फब्तियां कसने का मौका नहीं मिल पाया। फूलों के कारोबारियों को नुकसान बजरंग दल कार्यकताओं और शिव सैनिकों के खौफ के चलते मंगल पड़ाव में लगने वाले फूलों के बाजार में दिनभर पुलिस का पहरा लगा रहा।

बजरंगियों के डर से पर्याप्त ग्राहक न आने से फूलों की खरीददारी भी अपेक्षा से कम ही हुई।

“कुसुम भट्ट”

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100 सवालों के जवाब शादी से पहले पूछे

Posted on 14 February 2010 by admin

1. अपने पार्टनर का रोमांटिक स्तर समझें। जान लें कि वे प्यार और रोमांस के बारे में क्या सोचते हैं। हो सकता है कि आप प्यार जताने में यकीन रखती हों और वे समझने में यकीन रखते हों। समय के साथ यह रिश्ते की समस्या बन सकती है।

2. भावी पार्टनर से उनकी आर्थिक स्थिति डिस्कस करें। उनसे निवेश, लोन और निवेश के तरीकों पर जरूर बातचीत करें।

3. घरेलू कामकाज कई बार रिश्तों में उलझन की एक बडी वजह बन जाते हैं। अपने पार्टनर से जानें कि घर के काम-काज में उनका क्या योगदान हो सकता है और शादी के बाद वे इसमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कैसे करेंगे।

4. अपने होने वाले पार्टनर से परिवार की शुरुआत करने के बारे में जरूर डिस्कस करें। उनसे पूछें कि वह कब और कितने बच्चे चाहते हैं?

5. उनसे पूछें कि वे शादी के लिए तैयार हैं या नहीं? शादी से यहां मतलब सात फेरों से नहीं, बल्कि उसके साथ जुडे कमिटमेंट से है।

6. क्या वह खुद को पॉजिटिव इंसान मानते हैं?

7. कौन सी बातों से उन्हें गुस्सा आता है?

8. अपने गुस्से को शांत कैसे करते हैं?

9. क्या वह दूसरे की भूल को भूल समझ कर भुला देते हैं या बातें दिल में लंबे समय के लिए लग जाती हैं?

10. ऐसी कौन सी बात है, जिसके लिए वह कभी माफ नहीं कर सकते?

11. क्या वह जरूरी मुद्दों पर बात करना पसंद करते हैं या उन्हें खुद तक सीमित रखते हैं?

12 .क्या वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी ले लेते हैं या उन्हें दूसरों पर डालने की कोशिश करते हैं?

13 .किसी आपातकालीन स्थिति को वह कैसे हैंडल करते हैं?

14 .अपने परिवार के साथ उनका कैसा रिश्ता है?

15 .जानवरों के प्रति उनका कैसा व्यवहार रहता है?

16 .अनजान लोगों के प्रति उनका कैसा व्यवहार रहता है?

17.उन्हें अपना भविष्य कैसा चाहिए?

18. यदि कोई पुराना रिश्ता दोबारा उनके जीवन में आए तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी?

19. उनके अनुसार वह करियर की किस ऊंचाई तक पहुंचने का टारगेट रखते हैं?

20. फिलहाल वह अपने करियर में खुद को कहां पाते हैं?

21. फिलहाल वह किस तरह की लाइफस्टाइल जी रहे हैं?

22. किस तरह की जीवनशैली उन्हें आकर्षित करती है?

23. क्या वह धार्मिक प्रवृत्ति के हैं या धर्म में उनकी कितनी आस्था है?

24. रिश्तों में वह अपना वर्चस्व चाहते हैं या बराबरी में यकीन रखते हैं?

25. आपके काम करने से उन्हें कोई आपत्ति तो नहीं? यदि हां तो क्या आप फुल-टाइम जॉब कर सकती हैं?

26. क्या वह चाहते हैं कि आप घर में रहकर बच्चे की देखभाल करें?

27. क्या वह आपको हाउसवाइफ के रूप में देखते हैं?

28. उनके अनुसार बच्चे के लिए आदर्श पढाई-लिखाई का स्वरूप क्या है?

29. क्या वह बच्चों को परंपरागत शिक्षा देने में यकीन रखते हैं या वह अनुभव के आधार पर सीखने की बात मानते हैं?

30. बच्चों में सामाजिकता को कितना महत्व देते हैं वह, चाहे लडका हो या लडकी?

31. अगर आप वर्किग होंगी तो वह अपने बच्चे का खयाल किस तरह रखवाना चाहेंगे? अपने बच्चे को वह क्रेश में डालना चाहेंगे या घर में बेबी-सिटर पसंद करेंगे?

32. बच्चों के करियर को लेकर आशाएं क्या हैं?

33. घर में बच्चों के लिए अनुशासन के उनके क्या मानक हैं?

34. उन्हें कोई गंभीर बीमारी तो नहीं?

35. क्या उन्होंने कभी एचआईवी टेस्ट करवाया है?

36. उन्हें कोई वंशानुगत बीमारी तो नहीं? उनके परिवार में कोई बीमारी पीढी-दर-पीढी होती रहती है?

37. किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी की मेडिकल हिस्ट्री तो नहीं?

38. कभी कोई एक्सीडेंट या ऐसी बीमारी तो नहीं हुई जिसमें जीवन-मृत्यु का सवाल खडा हो गया हो?

39. क्या कभी कोई सर्जिकल ऑपरेशन हुआ है, यदि हां तो क्यों?

40. खुद को स्वस्थ रखने के लिए वह क्या करते हैं?

41. उन्हें कोई क्रॉनिक पेन तो नहीं रहता?

42. क्या उनका कोई मेडिकेशन चल रहा है? यदि हां, तो किसलिए?

43. क्या वह वेजिटेरियन हैं या नॉन-वेजिटेरियन?

44. क्या वह कोई डाइट प्लान फॉलो करते हैं?

45. उनकी हॉबीज क्या हैं?

46. आपकी उच्च शिक्षा के बारे में उनकी क्या राय है? अगर आप दोबारा पढाई करना चाहें तो क्या उनकी इजाजत होगी?

47. बच्चों की शिक्षा के बारे में उनकी क्या राय है? वे उन्हें हॉस्टल भेजना चाहेंगे? इसके अलावा उनसे धार्मिक शिक्षा के पहलुओं को भी डिस्कस कर लें।

48. क्या वे बच्चों की शिक्षा में खुद भी हिस्सेदार बनेंगे?

49. क्या वे कभी विदेश में बसने के बारे में भी सोचेंगे?

50. क्या वे कभी अपने होमटाउन में लौटना चाहेंगे?

51. क्या वे चाहेंगे कि उनके प्रोफेशन के अनुसार उनका परिवार भी उनके साथ शिफ्ट हो?

52. किसी जगह पर बसने से पहले क्या वे आपकी राय भी लेंगे?

53. वे किस तरह के घर में रहना पसंद करेंगे? किसी बडे आरामदायक बंगले में या सादगी से तैयार किए गए फ्लैट में? वे शहर के बीचोबीच रहने की बात सोचते हैं या भीड से अलग रहने में उनकी दिलचस्पी है?

54. उनके दोस्त कौन-कौन हैं?

55. अपने दोस्तों के बारे में उन्हें कौन सी बात सबसे ज्यादा पसंद है?

56. अपने दोस्तों के साथ शादी के बाद उनका कैसा रिश्ता रहेगा?

57. लडकियों के साथ उनकी कितनी दोस्ती रहती है?

58. अपनी महिला मित्रों के साथ शादी के बाद उनका कैसा रिश्ता रहेगा?

59. क्या शादी के बाद आप अपने दोस्तों से संबंध बनाए रख सकती हैं?

60. आपके दोस्तों के साथ रिश्ते को किस हद तक पसंद करेंगे वे?

61. क्या वे घर में मेहमानों का आना पसंद करते हैं?

62. जब आपके दोस्त घर आएंगे, तब उनका क्या रवैया होगा?

63. यदि वे किसी और भाषा के ज्ञानी हैं तो क्या वे चाहेंगे कि आप भी उस भाषा को सीखें?

64. क्या वे ट्रैवेल करते हैं, प्रोफेशनल या पर्सनल कामों के लिए?

65. क्या उन्हें वेकेशन के लिए जाना पसंद है?

66. क्या उन्हें पढने का शौक है?

67. उनके अनुसार पति का रोल रिश्ते को निभाने में क्या होता है?

68. पत्नी का रोल क्या होता है?

69. किसी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए वे क्या करते हैं?

70. क्या वे अपनी भावनाओं को लिखकर व्यक्त करने में यकीन रखते हैं?

71. यदि वे किसी के साथ कुछ गलत करें तो क्या अफसोस जताते हैं?

72. यदि किसी और ने उनके साथ गलत किया हो तो किस तरह के अफसोस जताने के तरीके में उन्हें यकीन है?

73. वे अपने निर्णय किसी के साथ बातचीत करके लेना पसंद करते हैं?

74. क्या वे कभी अपशब्दों का प्रयोग करते हैं?

75. क्या उनके दोस्त कभी अपशब्दों का प्रयोग करते हैं?

76. उन्हें अपने शादीशुदा रिश्ते को बेहतर तरीके से चलाने के लिए मेडिटेशन का सहारा लेने में कोई गुरेज तो नहीं?

77. यदि अपने रिश्ते में कोई दिक्कत आ जाए तो वे उसे कैसे सुलझाएंगे?

78. मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक उत्पीडन की उनकी परिभाषा क्या है?

79. क्या उन्हें किताबें पढना पसंद है?

80. क्या उन्हें फिल्में देखना पसंद है?

81. क्या उन्हें विडियो गेम/कंप्यूटर गेम्स पसंद हैं?

82. दिन में वे कितनी देर टीवी देखते हैं?

83. वे मनोरंजन के लिए क्या करते हैं?

84. काम के बाद वे क्या करना पसंद करते हैं?

85. क्या वे स्मोक करते हैं?

86. क्या वे कभी किसी लत के शिकार हुए हैं?

87. क्या वे ड्रिंक करते हैं?

88. क्या वे कभी रीहैबिलिटेशन सेंटर में इलाज करवा चुके हैं?

89. क्या वे व्यायाम करते हैं, यदि हां तो किस प्रकार के व्यायाम करना उन्हें पसंद है?

90. उनकी परवरिश किस तरह के माहौल में हुई?

91. उनके अंदर कौन सी आदत ऐसी है जिसे वे पारिवारिक कह सकते हैं?

92. अपने परिवार के साथ उनकी केमिस्ट्री कैसी है?

93. कौन-सी बातों को वे अपनी खूबियों में शामिल करते हैं?

94. कौन-सी बातों को वे अपनी बुराई मानते हैं?

95. क्या वे एबॉर्शन में यकीन रखते हैं?

96. होमोसेक्सुअलिटी के बारे में उनकी क्या राय है?

97. क्या वे मानते हैं कि विज्ञान ईश्वर की ताकत को चैलेंज कर सकता है?

98. क्या उनके कोई सेक्सुअल पार्टनर्स रहे हैं?

99. क्या उन्होंने कभी किसी रिश्ते में बेईमानी की है?

100. क्या वे आपको अकेले बाहर जाने देंगे?

नोट- यदि 50 से कम जवाब आपके अनुसार हैं तो यह रिश्ता निभाना मुश्किल होगा; यदि 50-75 सवालों के जवाब आपके अनुसार हैं तो रिश्ता आपके लिए उपयुक्त है; यदि 75 से ज्यादा सवालों के जवाब आपके अनुसार हैं तो रिश्ता आपके लिए बहुत अच्छा है। (ये सवाल मनोवैज्ञानिकों से बातचीत पर आधारित हैं)


Vikas Sharma
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प्यार जानने के वेलेंटाइन डे टिप्स

Posted on 14 February 2010 by admin

अगर आप किसी लड़की को चाहते हैं,
तो क्या आप को मालूम कि वो सिंगल है या नहीं। उसका कोई ब्वॉयफ्रेंड है या नहीं। वो भी आपकी तरह बेकरार है या नहीं। तो आपको करार पहुंचाने के लिए और प्यार का पहला कदम बढ़ाने के लिए कुछ मंत्र या टिप्स हैं, जिनके जरिए आप किसी लड़की का लव स्टेटस जान सकते हैं।

अगर वो आंखे ना चुराए…
अगर वो लड़की इधर-उधर बेवजह देखती नजर आए, किसी को ढूंढती नजर आए और वो आपसे आंखें ना चुराए.. तो मान लीजिए कि उसे किसी हमदम की तलाश है। क्योंकि अगर कोई लड़की किसी के साथ रिलेशनशिप में है तो वो अपने आस-पास कम ही नजरें घुमाती है।

जब नजरों से नजर मिले और वो आंहें भरे…
अगर आप किसी लड़की को चाहते हैं और ये जानना चाहते हैं कि क्या वो आपको भी चाहती है, तो जरा उसकी नजरों को पढ़िए। अगर वो आपसे नजरें मिला रही है और साथ में मुस्कुरा रही है, तो बस भइया कुड़ी आप पर फिदा है। फिर हो जाईए तैयार, क्योंकि शायद यही है प्यार….

दूरी के साथ, खुलकर करे सबसे बात
अगर वो लड़की कहीं भी किसी दूसरे लड़के के साथ खुलकर बात करती हो, मगर साथ में एक दूरी का भी ख्याल रखती हो तो यह दिखाता है कि वो लड़की बिल्कुल भी रूढ़िवादी या पुराने ख्यालों की नहीं। यानी वो खुले विचारों वाली लड़की है, जो आपके प्रपोजल पर हाय-तौबा नहीं मचाएगी और अगर आपमें दम है तो हसीना मान ही जाएगी।

प्रेमी जोड़ों को देख अगर तरसे मन..
अगर किसी प्रेमी जोड़े को देखकर वो लड़की उदास हो जाती है, उसके चेहरे के भाव बदल जाते हैं.. तो इसका मतलब है कि वो भी चाहती है कि कोई उसका भी साथी हो, जिसके साथ वो कुछ अच्छे पल बिता सके, हाथों में हाथ डाल कहीं जा सके और अपने तन्हाईओं का शोर मिटा सके। तो आप इस मौके का फायदा उठा सकते हैं और उसे जता सकते हैं कि आप ही हैं उसे सुख-दुख के हमसफर।

बॉडीलैंग्वेज करेगी सबकुछ बयान
बॉडीलैंग्वेज ऐसी भाषा है जिसे पढ़कर आप किसी लड़की की दिली तमन्नाओं को जान सकते हैं। जरा गौर से देखिए उस लड़की की अदाओं को वो सबकुछ बयान करेगी, जो वो लड़की खुद अपने होंठों से बयान न कर पाएगी।

बातों-बातों में छू लेना
अगर वो बातों-बातों में आपको छूती है, आपका हाथ पकड़ती है तो समझिए उसे आपके छूने पर भी कोई हर्ज नहीं। अगर वो आपसे एक दूरी बनाकर चलती है, बात भी कोसों दूर से करती है तो आप भी इस दूरी का ख्याल रखिए।

अगर वो हो चैटरबॉक्स
अगर वो लड़की चैटरबॉक्स की तरह आपसे बेवजह बातें करती जाए। भले ही वो बातें उसके डेली रूटीन से जुड़ी हो, जिसमें दुनिया भर का किस्सा हो और भले ही उसमें आपका जरा सा भी ना हिस्सा हो। लेकिन ध्यान रखिए अगर उसमें किसी दूसरे लड़के का जिक्र ना हो तो वो लड़की जताना चाहती है कि उसकी जिंदगी में कोई दूसरा शख्स नहीं है।

गर्लफ्रेंड्स के साथ ही दिखाई दे हर बार
अगर आप उस लड़की को बार-बार उन्हीं गिनी-चुनी गर्लफ्रेंड्स के साथ देखते हैं, तो इसका मतलब है कि उसकी कंपनी में कोई मेल पार्टनर नहीं है और वो पूरी तरह से सिंगल है।

गलत ना समझें दोस्ती को
अगर वो लड़की काफी फ्रेंडली हो और किसी से भी खुलकर बात करती हो तो इसका गलत मतलब मत निकालिए। ये उसकी फितरत है और यही दिखाता है कि वो बिल्कुल अकेली है। क्योंकि अगर कोई लड़की किसी के साथ सीरियस रिलेशनशिप में हो तो वो किसी दूसरे लड़के के साथ बातें करने में हिचकिचाएगी और एक दूरी जरूर बनाएगी।

सीधी बात, नो बकवास
अगर आप इन तरीकों से इतेफाक नहीं रखते और बिना टाइम खराब किए सीधा अपना लक आजमाना चाहते हैं, तो उस लड़की के पास डायरेक्ट जाईए, उससे बात कीजिए और कुछ वक्त साथ बिताने के बाद उसका फोन नंबर मांगिए। अगर वो लड़की अपना नंबर नहीं देना चाहती तो समझिए वो आपसे दूरी बनाना चाहती है। भले ही इसमें रिस्क है, लेकिन हुजूर रिस्क से ही बरकत है। तो फिर ट्राई-ट्राई एगेन……लगे रहिए कहीं तो बरकत होगी।


Vikas Sharma
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जिस पत्तल में खाते हैं, उसमें छेद करते हैं- राजेन्द्र चौधरी

Posted on 12 January 2010 by admin

लखनऊ- समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कुछ लोगों की मनोवृत्ति होती है कि जिस पत्तल में खाते हैं, उसमें छेद भी करते हैं। ऐसे एक नेता हैं जो जब कुछ पाना चाहते हैं, श्री मुलायम सिंह यादव की शरण में आ जाते हैं। दूसरे एक बड़बोले नेता श्री बेनीप्रसाद वर्मा पड़ोसी जनपद के हैं, आज कल अपने को खुद ही पार्टी के खेवनहार मान बैठे हैं पर हकीकत यह है कि वे अपने बेटे को भी नहीं जिता पाते हैं। जिले की सूबेदारी का दम भरने वाले इन नेता के रहते पार्टी का विधानसभा चुनावों में सफाया ही हुआ है।

विडम्बना है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव के चरित्र पर टिप्पणी करने वाले नेता ही उनसे सबसे ज्यादा फायदा उठाते रहे हैं। उन्हें पहले अपने चरित्र पर ध्यान देना चाहिए। अपनी मूल पार्टी में बड़ा सा बड़ा पद पाने वाले ये नेता अपनी पार्टी से दगाकर दो बार श्री मुलायम सिंह यादव के शरणागत हुए तो एक बार अपने बेटे और एक महिला को मंत्री पद दिलाया। दुबारा खुद लोकसभा पहुंचने के लिए और अपने बेटे का भविष्य संवारने के लिए आए। अब वे श्री यादव को स्वार्थी बता रहे हैं। दूसरे पड़ोसी जनपद के नेता का हाल तो यह है कि वे अपने जिले में ही पार्टी प्रत्याशियों को कभी जिता नहीं पाए, दूसरे जिले में भी जाकर हारे और फिर बड़ी मुश्किल से जिस पार्टी की मदद से लोकसभा पहुंचें वहॉ भी उन्होंने अपने नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृहमंत्री चिदम्बरम और यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गॉधी की छीछालेदर करने में कुछ कसर उठा नहीं रखी। इन महानुभावों ने इनके अपशब्दों के लिए खुद मॉफी मॉगी। अपने जनपद के कांग्रेसी सांसद को भी क्या-क्या नहीं कहते। दरअसल वे खुद जैसे हैं, वैसा ही दूसरों के बारे में सोचते हैं। उन्हें श्री मुलायम सिंह यादव ने ही गॉव से उठाकर प्रदेश स्तर का नेता बनाया था। अब वे एहसानफरामोशी को ही अपनी सफलता मानते हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने हमेशा दोस्तों से दोस्ती निभाई है। यह उनका चरित्र है। वे धोखा खाते रहे हैं, धोखा देते नहीं। उन्होंने दूसरों को नेता बनाकर कई बार अपने हाथ जलाए है। पर कभी उनको दोष नहीं दिया। अपनी आलोचनाओं को भी वे टाल जाते हैं। वे सही मायने में लोकतांत्रिक हैं और संकीर्ण स्वार्थों की नहीं, देशहित की राजनीति करते हैं। यह सभी जानते हैं कि कांग्रेस की सरकार को किस संकट के समय श्री यादव ने उबारा था अन्यथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की किरकिरी होती। अच्छा हो, श्री मुलायम सिंह यादव को बुरा-भला कहने वाले पहले अपने गिरेबान में भी झांककर देख ले।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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