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Archive | महाकुंभ

शाही स्नान के लिए कालबेलिया समाज का जत्था रवाना

Posted on 05 May 2010 by admin

मोक्षदायिनी गंगा की पावन धरा हरिद्वार में चल रहे महाकुम्भ में होने वाले चतुर्थ शाही स्नान के लिए सोमवार को अखिल राजस्थान जोगी कालबेलिया समाज कल्याण समिति राजसमंद के बैनर तले 90 यात्रियों का जत्था हरिद्वार के लिए रवाना हुआ। समाज के सैंकड़ों लोगों ने यात्री जत्थे का आत्मीयता से स्वागत करते हुए बाबा रामदेव के गगनभेदी जयकारों की गूंज के साथ भावपूर्ण विदाई दी।

समीपवर्ती पीपरड़ा भट्टा स्थित कालबेलिया बस्ती में यात्रा को लेकर सुबह से मेले का माहौल बन गया। सुबह सवा नौ बजे बस्तिवासियों के साथ आसपास के विभिन्न गांवों से आए समाज के महिला-पुरूषों ने यात्रा का नेतृत्व कर रहे समाज के प्रदेश अध्यक्ष शंकरनाथ नंगाणी के अलावा समाज के संत कालूनाथ हकारी एवं बाबा रामदेव मंदिर के पुजारी कालूनाथ देराण एवं अन्य जातरूओ का फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान बाबा रामदेव व गंगा मैया की जयघोष लगाई। इसके पश्चात थाली-मांदल व ढोल नगाडॉ के साथ यात्रियों ने देवी-देवताओं के धोक लगा कर हरिद्वार की ओर प्रस्थान किया।

इस अवसर पर प्रदेश सचिव लक्ष्मण नाथ, संगठन मंत्री रतननाथ, कोषाध्यक्ष सवानाथ गारडी, जोधनाथ हकारी, प्रभुनाथ गारडी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के संयोजक शंकरनाथ नंगाणी ने बताया कि जत्थे में समाज के 23 पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी शामिल है। हरिद्वार में शाही स्नान कर सम्पूर्ण क्षेत्र में भरपूर बारिश, खुशहाली, समृद्धि की कामना करेंगे। यात्रियों के जत्थे के पीपरड़ा बस स्टेण्ड पहुंचने पर लोगों ने अभिनंदन किया।

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एक हजार हिन्दुओं की हुई घर वापसी

Posted on 29 March 2010 by admin

हरिद्वार -  धर्मनगरी में धर्म परिवर्तित एक हजार चालीस परिवारों ने पुन: हिंदू धर्म अपना लिया। दक्षिणपीठ नाणीज महाराष्ट्र के जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी नरेन्द्राचार्य महाराज के सानिध्य में रविवार को मध्य एवं दक्षिण भारत के 1040 परिवारों ने ईसाई धर्म को त्यागकर वापस हिन्दू धर्म को अपना लिया।

हरकी पैड़ी पर सभी को गंगा स्नान कराने के बाद विधि-विधान से संस्कार देकर हिन्दू धर्म में वापसी कराई गई। सभी परिवारों ने संकल्प लिया कि जिस प्रलोभन के कारण वे हिन्दू से ईसाई बने थे, भविष्य में कभी भी उस प्रलोभन में नहीं आएंगे। सभी परिवारों ने सनातन धर्म में पूर्ण निष्ठा रखने की शपथ ली। हरिद्वार में हुए अब तक के सबसे बड़े धर्म परिवर्तन समारोह के बाद नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। किसी एकल सन्त की यह सबसे बड़ी पेशवाई थी। रामानन्द संप्रदाय की दक्षिणपीठ नानीज धाम महाराष्ट्र के जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी नरेन्द्राचार्य महाराज ने कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसी की रक्षा करता है। पूरे विश्व में हिन्दुत्व का डंका बज रहा है। कुछ लोग दरिद्रता का लाभ उठाकर हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। उनका मिशन है कि ऐसे लोगों को सनातन धर्म की धारा में वापस लाया जाए।जगद्गुरु ने कहा कि निर्धनता किसी के लिए अभिशाप नहीं बनेगी।

इस अवसर पर मंचासीन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि धर्म रक्षा के कार्य में साधु-संतों की अहम भूमिका रही है। इसी कड़ी में यह प्रयास भी फलीभूत हुआ है। देर ही सही, लेकिन धर्म परिवर्तित एक हजार चालीस परिवार वापस अपने घर लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि विवशतावश और प्रलोभन में आकर लोग धर्म परिवर्तित कर रहे हैं, जिस पर प्रभावी रोक के लिए ऐसे प्रयास नितांत जरूरी हैं।

धर्म दीक्षा समारोह के बाद विशाल जुलूस बैरागी द्वीप से हरकी पैड़ी तक निकाला गया। जगद्गुरु नरेन्द्राचार्य महाराज के साथ अनेक रथों पर महामण्डलेश्वर रामलखन दास, फूलडोलदास, सियावल्लभ शरण, रामकुमार दास, कालिका पीठाधीश्वर सुरेन्द्र नाथ अवधूत, सांसद आदित्य नाथ, माधो दास, परिषद अध्यक्ष श्रीमहन्त ज्ञान दास, गौरीशंकर दास, आचार्य महामण्डलेश्वर डा. कैलाश मानव, हठयोगी, आदि सवार थे। विभिन्न झांकियां सजाई गई थी तथा हजारों की भीड़ शोभा यात्रा में चल रही थी। शोभा यात्रा हरकी पैड़ी पहुंची और हजारों ने गंगा स्नान किया। गंगा स्नान के बाद बैरागी द्वीप पर वापसी शोभायात्रा के रूप में ही हुई।

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कुंभ मेले का तीसरा शाही स्नान 30 मार्च को

Posted on 28 March 2010 by admin

हरिद्वार- कुंभ मेले का तीसरा शाही स्नान 30 मार्च को होगा। इसके मद्देनजर बड़ी संख्या में यहां श्रद्वालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। शाही स्नान के लिए साधू संतों  तथा श्रद्वालुओं के समूह यहां पहुंच रहे हैं।

चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले तीसरा शाही स्नान मे अन्य राज्यो से श्रद्वालुओं के समूह कुंभ मेला क्षेत्र मे पहुँच रहे है दिल्ली के बाबा लाल दयायु और जय मां मिशन की उषा माता अपने कई भक्तों के साथ  कुंभ क्षेत्र में प्रवेश कीं।

मेला प्रशासन के अनुसार कुंभ के इस महा मेले के दौरान मेला क्षेत्र में शाही स्नान के दौरान सुरक्षा मामलों में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जायेगा और श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा और सुगमता के साथ स्नान कराया जायेगा।

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धर्म के साथ विज्ञान की महत्ता पर जोर

Posted on 24 March 2010 by admin

गोष्ठियां के माध्यम से सामाजिक और वैज्ञानिक विषयों पर होगी चर्चा

हरिद्वार - सामाजिक और वैज्ञानिक विषयों को धर्म के साथ जोड़कर उसे जनजीवन के बीच सुलभ बनाने का कार्य कुम्भ क्षेत्र में सन्तों और संगठनों के माध्यम से किया जा रहा है। इन विषयों को लेकर गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं जिनमें सन्त-महात्माओं को मुख्यवक्ता के रूप में शामिल किया गया है। वर्तमान में समाज के लिए धर्म और विज्ञान दोनों का विशेष महत्व हैं। इस विषय में सन्तों का ज्ञान सर्वोपरि है। संगोष्ठियों में सन्तों के साथ विशेषज्ञों को भी आमन्त्रित किया गया है।

दिव्य सेवा प्रेम मिशन की ओर से आगामी एक अप्रैल से 12 अप्रैल तक राष्ट्रीय और विश्व परिदृश्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार अलग-अलग विषयों पर मन्थन कार्यक्रम के तहत गोष्ठियां आयोजित की गई हैं, जिसमें मुख्य वक्ताओं के रूप में शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती, सन्त कैलाशानन्द, स्वामी वियोगानन्द सरस्वती, स्वामी चिदानन्द मुनि,स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, विजय कौशल महाराज, आशीष गौतम प्रमुख हैं।

हरिहर आश्रम की ओर से अप्रैल में जल संसद का आयोजन किया जाएगा, जिसमे विशेषज्ञों की ओर से इस सन्दर्भ में पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे, तो सन्तों की ओर से ग्लोबल वार्मिंग पर विशेष व्याख्यान दिया जाएगा। जल संसद के आयोजक स्वामी अवधेशानन्द गिरी स्वंय हैं।

ग्लोबल वार्मिंग, भारतीय दृष्टि में पर्यावरण,बाजारवाद व्यवस्था में भारतीय सेवादृष्टि,भारतीय विश्व दृष्टि, वर्तमान शिक्षा का विकल्प, भारतीय जीवन दृष्टि, वैश्विक संघर्ष में भारतीय संस्कृति की भूमिका सहित कई अनेक विषय शामिल हैं।

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संतों की नेतागिरी उचित नहीं- सुबोधकांत

Posted on 21 March 2010 by admin

हरिद्वार- महाकुंभ में स्थान करने सपरिवार आए केन्द्रीय खाद्य प्रसंसकरण मंत्री सुबोध कांत सहाय ने संतों के राजनीति में आने का विरोध करते हुए कहा कि संतों का काम धर्मोपदेश देना है। संतों का स्थान सबसे ऊंचा है, परन्तु राजनीति में पड़कर यदि वे घालमेल करेंगे तो वे न तो संत रह पाएंगे और न ही राजनीतिज्ञ बन पाएंगे। श्री सहाय ने प्रकृति के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को मानव जीवन के लिए खतरनाक बताते हुए आज यहां कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सामूहिक प्रयास जरुरी है।

हरिद्वार में महाकुंभ में स्थान करने सपरिवार आए श्री सहाय ने स्वामी अधोक्षजानंद के शिविर में नवरात्र पूजा कर, स्वामी अधोक्षजानंद से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। सहाय ने बताया कि अखाड़ा परंपरा के संतों ने गंगा की अविरल धारा को बनाए रखने के लिए गंगा पर बन रहे बांधों पर रोक की मांग की है, जिस पर गम्भीरता से विचार करके बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिये। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में प्राकृति को उथलपुथल कर दिया गया है जिससे ग्लोबल वार्मिग जैसी समस्याएं पैदा हुई हैं, यदि समय रहते  इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके खराब परिणाम होंगे।

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हरकी पैड़ी पहुंचे नारायण

Posted on 21 March 2010 by admin

हरिद्वार -हरकी पैड़ी बह्माकुंड अद्भुद संयोग का गवाह बना, जब नारायण स्वयं नारायणी के दर्शन को पहुंचे। भगवान तिरुपति बालाजी श्रीदेवी और भूदेवी के साथ महाकुंभ में गंगा स्नान को पहुंचे। दक्षिण भारतीय पुजारियों ने विधि-विधान से भगवान बालाजी का अभिषेक किया और उत्सव मूर्ति ने गंगा स्नान किया।

कुंभ का यह ऐतिहासिक दिन था, जब हजारों किलोमीटर लंबी दूरी तय कर दक्षिण भारत से भगवान विष्णु के अवतार बालाजी अपने श्री विग्रहों के साथ कुंभ स्नान को पहुंचे। दक्षिणी पण्डितों द्वारा हरकी पैड़ी पर वैदिक मन्त्रों का ऐसा उद्घोष किया गया कि सभी चमत्कृत रह गए। श्री गंगा सभा कार्यालय पर बालाजी की उत्सव मूर्ति के साथ श्रीदेवी, भूदेवी का पंचगव्य से करीब दो घंटे तक अभिषेक किया गया। डॉलर शेषाद्र स्वामी की अगुवाई में दक्षिण भारत के चालीस विद्वान पुजारियों ने भगवान की उत्सव मूर्ति पर लेप चढ़ाया। इसके बाद ब्रह्माकुंड में पारंपरिक विधि-विधान से तिरुपति बाला जी की प्रतिमाओं को गंगा में स्नान कराकर मन्त्रोच्चारण के साथ उनका श्रृंगार किया गया।  हजारों तीर्थ यात्रियों ने भी दो घंटे चली इस विशिष्ट पूजा का आनन्द लिया।

इस अनूठे संगम को देखने के लिए देशी-विदेशी श्रद्धालु हरकी पैड़ी पर उमड़ पड़े। कुंभ के इतिहास में यह पहला मौका है जब दक्षिण और उत्तर का धार्मिक और आध्यात्मिक संगम हुआ है। पहली बार तिरुपति बालाजी के सचल स्वर्ण विग्रह कुंभ नहाने आए हैं। बताया जाता है कि तिरुपति स्थित मन्दिर के मुख्य पुजारी को स्वयं भगवान तिरुपति ने स्वप्न में कहा था कि वे कुंभ नहाना चाहते हैं, परिणाम स्वरूप उनकी प्रतिमाएं इतनी लंबी दूरी तय कर हरिद्वार लाई गई।

तिरुपति से आई प्रतिमाओं का स्वागत गंगा सभा केसभापति कृष्ण कुमार शर्मा, अध्यक्ष रामकुमार मिश्रा, महामन्त्री वीरेन्द्र श्रीकुंज आदि के नेतृत्व में सैकड़ों पुरोहितों ने किया।  पूजा का अद्भुत नजारा देखकर सभी गदगद हो उठे।

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सन्तों ने दी कुंभ बहिष्कार की धमकी

Posted on 20 March 2010 by admin

हरिद्वार - अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने गंगा पर बनाई जा रही दो बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं लोहारी नागपाला और भैरोघाटी को तत्काल रद करने की मांग की है। परिषद ने कहा है कि हम गंगा की अविरल धारा में स्नान करना चाहते हैं। दुर्भाग्य से गंगा को बांध दिया गया है और नए सिरे से बांधा जा रहा है। सन्त समाज इसे कतई बर्दास्त नहीं करेगा।

परिषद ने कहा है कि यदि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा बनवाई जा रही इन परियोजनाओं पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो 30 मार्च के शाही स्नान और 14 अप्रैल को कुंभ के मुख्य स्नान का बहिष्कार किया जाएगा।

सभी साधु-सन्त अपने तंबू उखाड़कर कुंभ मेले का बहिष्कार कर देंगे। साथ ही मांगों को लेकर अखाड़ों से जुड़े सन्त सोमवार से हरकी पैड़ी पर सात दिनों का धरना शुरू कर देंगे। धरना प्रारंभ करने से पूर्व केन्द्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजे जा रहे हैंए जिसमें दोनों शाही स्नानों के साथ.साथ समूचे कुंभ के बहिष्कार की स्पष्ट धमकी दी जा रही है। शुक्रवार शाम बैरागी द्वीप स्थित निर्वाणी अणी अखाड़े में हुई अखाड़ा परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बैठक के निर्णयों की जानकारी पत्रकारों को परिषद अध्यक्ष श्रीमहन्त ज्ञान दास तथा महामन्त्री श्रीमहन्त हरि गिरि ने दी।

श्रीमहन्त ने बताया कि सन्तों ने गंगा पर चल रही सभी 20 परियोजनाओं पर भी रोक लगाने की मांग की है। परिषद ने कहा है कि जिन योजनाओं पर काम हो रहा है या हो चुका है उन पर आया सारा खर्च सन्त समाज दुनिया भर में फैले हिन्दुओं से चन्दा एकत्र करके भरपाई कर देगा। गंगा में प्रदूषण समाप्त करने के लिए केन्द्र द्वारा घोषित 500 करोड़ रुपये की राशि को भी बढ़ाने की मांग अखाड़ा परिषद ने की है।

अखाड़ा परिषद की बैठक में श्रीमहन्त ज्ञान दास, हरि गिरि, रवीन्द्र पुरी, हनुमान बाबा, कैलाशानन्द ब्रह्मचारी,त्रयंबक भारती गोविन्दानन्द, शंकरानन्द, राजेन्द्र दास आदि विभिन्न अखाड़ों से जुड़े परिषद सदस्यों ने भाग लिया।

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शाही स्नानों से पूर्व अखाड़े हजारों नागा संन्यासी बनाएंगे

Posted on 19 March 2010 by admin

हरिद्वार - महाकुंभ के आगामी शाही स्नानों से पूर्व विभिन्न अखाड़े हजारों नागा संन्यासी बनाएंगे। नए संन्यासी बनाने की सर्वाधिक तैयारियां जूना, आवाहन और महानिर्वाणी अखाड़ों में चल रही हैं। संन्यासी अखाड़ों के साथ-साथ बैरागी और उदासीन अखाड़े भी अनेक महामण्डलेश्वर बनाने जा रहे हैं।

महाकुंभ के पहले शाही स्नान पर करीब दो हजार नागा निकालने वाले संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े ने दूसरे शाही स्नान पर आठ-दस हजार नागा निकाल कर सभी को हैरत में डाल दिया था। अन्य अखाड़ों के नागाओं की संख्या भी बड़ी थीए किन्तु जूना ने सबको मात दे डाली थी। अब यह भनक मिलते ही कि जूना अखाड़ा आखिरी शाही स्नान से पूर्व हजारों की संख्या में नए नागाओं को दीक्षा देने जा रहा है, अन्य संन्यासी अखाड़ों में भी नए नागा बनाने की तैयारियां शुरु हो गई हैं। यद्यपि तीसरा शाही स्नान भी अभी होना है, किन्तु अखाड़ों का आकर्षण चौथा और मुख्य शाही स्नान है। अप्रैल मास में काफी बड़ी संख्या में नागाओं को दीक्षा प्रदान की जाएगी।

महाकुंभ के अवसर पर अभी तक संन्यासी अखाड़ों ने ही महामण्डलेश्वर बनाए हैं। उदासीन नए अखाड़े ने दो महामण्डलेश्वर बनाए थे। अब बैरागी अखाड़े जहां कि महामण्डलेश्वरों को खालसा कहा जाता है, बड़ी संख्या में खालसे बनाने जा रहा है। बैरागियों के महामण्डलेश्वरों की संख्या तीन अंकों तक पहुंच सकती है। वहीं बड़ा अखाड़ा उदासीन व निर्मल अखाड़े ने भी अनेक सन्तों का पट्टाभिषेक महामण्डलेश्वर पद पर करने का निर्णय लिया है। 14 अप्रैल को होने वाले मुख्य शाही स्नान से पूर्व कुंभनगरी में विरजाहोम परंपरा का बड़ा स्वरूप दिखाई पड़ेगा। सभी अखाड़े इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं।

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उत्तराखंडः हैलीकाप्टर सेवा चालू

Posted on 18 March 2010 by admin

हरिद्वार  - अब आकाश मार्ग से महाकुंभ के शहर के दर्शन हो सकेंगे , दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बाधित हैलीकाप्टर सेवा को चालू किया गया, महाकुंभ के अवसर पर मेला क्षेत्र के दर्शन के लिए तीर्थयात्री अब हैलीकॉप्टर की मदद से देख सकते है। उत्तराखंड सरकार ने एक निजी कंपनी को महाकुंभ क्षेत्र के हवाई दर्शन का ठेका दिया है। तीर्थनगरी से आज सस्ती दरों पर हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत हुई। कुंभ दर्शन के लिए केवल 2999 रुपये प्रति यात्री खर्च करने होंगे। हवाई दर्शन का शुभारंभ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने किया।

पवन हंस के हेलीकाप्टर ने पहली उड़ान वैरागी कैंप से तकरीबन दोपहर 12.25 बजे भरी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत ज्ञानदास ने विधिवत इसका उद्घाटन किया और पहली उड़ान में आकाश मार्ग से कुंभनगरी के दर्शन किये।

हैलीकाप्टर सेवा कंपनी के  प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड हेली सर्विस ने पवन हंस के साथ अनुबंध किया है। पवनहंस से अनुबंध करके कंपनी ने उत्तराखंड में हवाई सेवाएं आरंभ की है। हैलीकॉप्टर के जरिए हरिद्वार के अलावा उत्तराखंड के चारों धामों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गौमुख के  दर्शन श्रद्धालु कर सकेंगे। हालांकि इससे पहले एक हैलीकाप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद इस सेवा पर रोक लगा दी गई थी।

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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती और स्वरूपानन्द ने लगाई डुबकी

Posted on 16 March 2010 by admin

हरिद्वार - शाही स्नान और सोमवती अमावस्या का संयोग लगभग 750 वर्ष बाद बना। इस संयोग के साथ ही हरिद्वार के कुंभ में सोमवार को एक और संयोग बना ऐसा पहली बार हुआ कि दो पीठों के शंकराचार्य ने एक साथ गंगा में थ्ान किया।  गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने एक साथ वीआईपी घाट पर डुबकी लगाई।

शाही स्नान और सोमवती अमावस्या  के अवसर पर चार शंकराचार्यो ने गंगा स्नान किया, जिसमें शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती और शंकराचार्य नरेन्द्रानन्द सरस्वती भी हैं।  शंकराचार्यो का कहना था कि उन्होंने एक परंपरा की शुरुआत की है, इसको कायम रखना आने वाले समय, लोगों और राजनीतिज्ञों पर निर्भर करेगा। शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती एक साथ उतरकर गंगा में स्नान करते हैं। 15 मिनट का यह स्नान क्रम उनकी डुबकी के साथ ही नए इतिहास को बना चुका था। दूसरी ओर हरकी पैड़ी पर स्नान करने के लिए अखाड़ों के साथ ज्योर्तिर पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती और सुमेरु पीठ के शंकराचार्य नरेन्द्रानन्द सरस्वती भी पहुंचे। हालांकि अखाड़ों के साथ इन्होंने अलग-अलग स्नान किया। स्नान के बाद शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि देश के 85 करोड़ हिन्दू सनातनी हैं। धर्म और हिन्दुत्व को बचाए रखने के लिए उन्होंने एक नई शुरुआत की हैए इसे बचाए रखना अब आगे के लोगों का काम है। वहीं शंकराचार्य निश्चलानन्द ने सद्भाव का सन्देश दिया। उन्होंने कहा कि राजनितिज्ञ देश और हिन्दुत्व की रक्षा के लिए कार्य करें।

महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान में सभी तेरह अखाड़ों के शाही जुलूस जब अलग-अलग समय पर स्नान के लिए ब्रह्मकुंड पहुंचे, साधु-संतों का अलग ही वैभव और उस पर उनके निरे-निराले अंदाज। अंदाज भी ऐसे कि देखने वालों के मन में श्रद्धा का अपार सैलाब उमड़ पड़ता है। धर्मनगरी में सोमवती अमावस पर महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान के दौरान विभिन्न अखाड़ों में आए साधु-संन्यासियों के निराले अंदाज हर किसी के लिए श्रद्धा व आकर्षण का केंद्र बने रहे। कहीं सोने-चांदी के आसनों पर विराजमान आचार्य महामंडलेश्वरों, महामंडलेश्वरोंका वैभव था तो कहीं नागा साधुओं की अवधूती माया। न सिर्फ भारतीय, बल्कि विदेशी संन्यासी व श्रद्धालु भी पूरी तरह से सनातनी संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।

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महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
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