मुख्यमंत्री ने डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को तहसील सदर में छापा मारा। वहां की अव्यवस्था देकर सीएम भड़क गए। उन्होंने प्रशासनिक अफसरों को जमकर लताड़ लगाई। निर्देश दिया कि हफ्ते भर में तहसील की व्यवस्था चाक-चौबंद हो जानी चाहिए। सीएम ने लापरवाही के मामले में तहसील के नाजिर को निलंबित कर दिया।
निशंक ने तहसील में जब छापा मारा तो तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक गैरहाजिर मिले। छापे की सूचना किसी भी अफसर को नहीं थी। उनके तहसील पहुंचने के १५ मिनट बाद एसडीएम सदर विनोद गिरी से लेकर एडीएम विनोद कुमार सुमन तथा जिलाधिकारी डी सेंथिल पांडियन मौके पर पहुंच गए। जांच में मुख्यमंत्री ने पाया कि ५० से अधिक लाभार्थियों के चेक विवेकाधीन कोष के तहत एक माह पहले कट चुके थे, लेकिन उसका वितरण नहीं किया गया। चेकों को तहसील की आलमारी में बंद करके रखा गया था। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले नाजिर हरे लाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही कानूनगो राज सिंह को चेतावनी दी गई। विवेकाधीन लाभार्थी प्रभा नैथानी नामक महिला से चेक प्राप्त करने की प्रक्रिया और उसमें होने वाली परेशानी के बारे में जानकारी प्राप्त की। मूल निवास तथा जाति प्रमाण पत्र के रजिस्टर के अभिलेखों के रखरखाव के तरीकों पर भी नाराजगी जाहिर की।
मुख्यमंत्री ने जनाधार सेवा केंद्र से लेखपालों तक प्राप्ति की तिथि तथा संबंधितों को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की तिथि का स्पष्ट अंकन करने के लिए निर्देश दिए, जिससे दोषियों को चिन्ह्ति किया जा सके। लेखपाल ईश्वर सिंह तथा लेखपाल सतीश कुमार के रजिस्टर भी जब्त किए गए।
मुख्यमंत्री ने छापामारी के दौरान अफसरों से सवाल किया यदि सरकार गरीब, बेसहारा तथा लाचार व्यक्तियों को मदद करना चाहती है तो उसमें कर्मचारी क्यों अड़ंगा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी।













